राम माधव का अमेरिका पर तीखा हमला, बोले–

भाजपा नेता राम माधव ने अमेरिका के रुख पर कड़ा बयान देते हुए कहा कि भारत पहले ही कई फैसले अंतरराष्ट्रीय दबाव में ले चुका है, जिसमें रूस और ईरान से तेल खरीद पर रोक शामिल है। उन्होंने घरेलू राजनीति में हो रही आलोचना और वैश्विक ऊर्जा संकट के बीच भारत की विदेश नीति पर सवाल उठाए। यह बयान अंतरराष्ट्रीय कूटनीति और ऊर्जा नीति पर नई बहस को जन्म दे रहा है।

राम माधव का अमेरिका पर तीखा हमला, बोले–

दि राइजिंग न्यूज डेस्क | 24 अप्रैल 2026 ।

अमेरिका के रुख पर तीखी टिप्पणी

भारतीय जनता पार्टी के नेता और विचारक राम माधव ने अमेरिका के रवैये पर कड़ा बयान देते हुए कहा कि भारत पहले ही कई महत्वपूर्ण निर्णय अंतरराष्ट्रीय दबाव में ले चुका है। उन्होंने कहा कि भारत ने ईरान से तेल आयात बंद किया और रूस से तेल खरीद पर भी रोक लगाई, जिसके कारण देश को घरेलू स्तर पर राजनीतिक आलोचना का सामना करना पड़ा।
इसके अलावा उन्होंने यह भी संकेत दिया कि वैश्विक शक्तियों के दबाव में नीति बनाना किसी भी उभरती अर्थव्यवस्था के लिए आसान नहीं होता और भारत लगातार अपने हितों को प्राथमिकता देने की कोशिश कर रहा है।


घरेलू राजनीति पर भी उठाए सवाल

राम माधव ने कहा कि इन फैसलों के बाद सरकार को विपक्ष की ओर से लगातार आलोचना झेलनी पड़ी। उन्होंने सवाल किया कि जब भारत पहले ही कई रणनीतिक समझौते कर चुका है, तो आखिर अमेरिका और क्या चाहता है।
उनके अनुसार, भारत अपने राष्ट्रीय हितों और अंतरराष्ट्रीय संबंधों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रहा है।
उन्होंने यह भी जोड़ा कि विदेश नीति के फैसलों को केवल राजनीतिक नजरिए से नहीं, बल्कि दीर्घकालिक रणनीति के रूप में देखा जाना चाहिए।


वैश्विक तनाव के बीच बयान

यह बयान ऐसे समय में आया है जब अमेरिका और ईरान के बीच तनाव चरम पर है। दुनिया भर में ऊर्जा नीति, कूटनीति और रणनीतिक संतुलन को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे हालात में भारत जैसे देशों पर दबाव और अधिक बढ़ सकता है।
इसके साथ ही वैश्विक बाजार में तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव का असर विकासशील देशों पर सीधे तौर पर पड़ता है।


ऊर्जा नीति और रणनीतिक संतुलन

भारत की ऊर्जा जरूरतें लगातार बढ़ रही हैं, ऐसे में तेल आपूर्ति को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई चुनौतियां सामने आ रही हैं।
रूस और अन्य देशों से ऊर्जा संबंधों को लेकर लिए गए फैसले भारत की विदेश नीति का अहम हिस्सा रहे हैं।
इसी कारण यह मुद्दा सिर्फ राजनीतिक नहीं बल्कि रणनीतिक भी माना जा रहा है।
साथ ही भारत अब ऊर्जा स्रोतों में विविधता लाने की दिशा में भी काम कर रहा है ताकि किसी एक देश पर निर्भरता कम हो सके।


राम माधव के बयान ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय दबाव और भारत की विदेश नीति पर बहस को तेज कर दिया है।
यह स्पष्ट है कि भारत को अपनी ऊर्जा और कूटनीतिक जरूरतों के बीच संतुलन बनाए रखते हुए आगे बढ़ना होगा।
आने वाले समय में वैश्विक परिस्थितियां और अधिक जटिल हो सकती हैं, ऐसे में नीति-निर्माण में सतर्कता बेहद जरूरी होगी।