यूपी में 170 सीटों पर कांग्रेस की नजर, सपा के लिए खींची नई लकीर

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर कांग्रेस ने अपनी रणनीति तेज कर दी है. पार्टी ने ए ग्रेड की 170 विधानसभा सीटों की पहचान की है और इन्हीं सीटों को लेकर गठबंधन वार्ता में मजबूत दावा पेश करने की तैयारी कर रही है. कांग्रेस सांसद इमरान मसूद के बयानों ने सपा और कांग्रेस के रिश्तों को लेकर नई राजनीतिक बहस छेड़ दी है.

यूपी में 170 सीटों पर कांग्रेस की नजर, सपा के लिए खींची नई लकीर

दि राइजिंग न्यूज़ | लखनऊ | 16 जून 2026

विधानसभा चुनाव को लेकर कांग्रेस ने तेज की तैयारी

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारियां अभी से तेज होती दिखाई दे रही हैं. कांग्रेस ने राज्य में अपनी राजनीतिक रणनीति को धार देना शुरू कर दिया है और गठबंधन की संभावनाओं के बीच अपनी ताकत दिखाने की कोशिश में जुट गई है. पार्टी सांसद इमरान मसूद के हालिया बयान ने यह संकेत दे दिया है कि कांग्रेस इस बार केवल सहयोगी दल की भूमिका में नहीं रहना चाहती, बल्कि सीट बंटवारे में अपनी मजबूत हिस्सेदारी सुनिश्चित करने की तैयारी कर रही है.

ए ग्रेड की 170 सीटों पर कांग्रेस का दावा

इमरान मसूद ने दावा किया है कि कांग्रेस ने उत्तर प्रदेश की विधानसभा सीटों को ए, बी और सी श्रेणी में बांटकर अपना आंतरिक मूल्यांकन पूरा कर लिया है. उनके अनुसार पार्टी ने ए ग्रेड की 170 सीटों की पहचान की है जहां कांग्रेस चुनाव लड़ने की तैयारी कर रही है. माना जा रहा है कि गठबंधन वार्ता के दौरान कांग्रेस इन्हीं सीटों पर अपना प्रमुख दावा पेश कर सकती है. राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह संख्या कांग्रेस की महत्वाकांक्षी रणनीति को दर्शाती है और पार्टी सीट बंटवारे में अपनी स्थिति मजबूत करना चाहती है.

सपा के लिए दिया स्पष्ट संदेश

इमरान मसूद ने समाजवादी पार्टी और उसके अध्यक्ष अखिलेश यादव को लेकर भी स्पष्ट संदेश दिया. उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय राजनीति में अब दो प्रमुख धाराएं दिखाई देती हैं. उन्होंने कहा कि एक ओर राहुल गांधी हैं और दूसरी ओर नरेंद्र मोदी. ऐसे में विपक्षी दलों को अपना पक्ष स्पष्ट करना होगा और बीच का रास्ता निकालने की संभावना अब बहुत कम रह गई है. मसूद ने कहा कि अखिलेश यादव को भी राहुल गांधी के साथ कदम मिलाकर चलना होगा और अलग राजनीतिक धारा खड़ी करने की सोच व्यावहारिक नहीं होगी.

सीट बंटवारे को लेकर बढ़ सकती है चुनौती

कांग्रेस द्वारा 170 सीटों पर दावा किए जाने के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या समाजवादी पार्टी इतनी बड़ी संख्या में सीटें छोड़ने के लिए तैयार होगी. पिछले चुनावों के आंकड़े और दोनों दलों की राजनीतिक ताकत को देखते हुए सीट बंटवारा आसान नहीं माना जा रहा है. ऐसे में आने वाले महीनों में दोनों दलों के बीच लंबी बातचीत देखने को मिल सकती है.

ओवैसी और चंद्रशेखर आजाद पर भी नजर

इमरान मसूद ने असदुद्दीन ओवैसी और चंद्रशेखर आजाद को लेकर भी सकारात्मक टिप्पणी की. उन्होंने ओवैसी को अपना बड़ा भाई बताया जबकि चंद्रशेखर आजाद को मित्र और हमदर्द कहा. हालांकि संभावित गठबंधन को लेकर उन्होंने कोई स्पष्ट संकेत नहीं दिया और कहा कि अंतिम फैसला पार्टी नेतृत्व करेगा. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि कांग्रेस विभिन्न सामाजिक और राजनीतिक समूहों को साथ जोड़ने की संभावनाओं पर भी विचार कर रही है.

दलित मुस्लिम और ब्राह्मण वोट बैंक पर फोकस

सूत्रों के अनुसार कांग्रेस की रणनीति उन सीटों पर अधिक केंद्रित है जहां दलित, मुस्लिम और ब्राह्मण मतदाताओं की प्रभावी संख्या है. पार्टी का मानना है कि इन क्षेत्रों में उसका पारंपरिक जनाधार रहा है और बेहतर संगठनात्मक प्रयासों के जरिए उसे फिर से मजबूत किया जा सकता है. इसी आधार पर सीटों का वर्गीकरण किया गया है और भविष्य की चुनावी रणनीति तैयार की जा रही है.

गठबंधन की नई रूपरेखा पर काम

इमरान मसूद ने संकेत दिए कि कांग्रेस उत्तर प्रदेश में गठबंधन की नई रूपरेखा तैयार कर रही है. उन्होंने कहा कि भविष्य में कई छोटे राजनीतिक दल भी इस गठबंधन का हिस्सा बन सकते हैं. कांग्रेस विभिन्न सामाजिक और राजनीतिक समीकरणों को ध्यान में रखते हुए अपनी रणनीति बना रही है.

कांग्रेस नहीं बनना चाहती केवल सहयोगी दल

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि कांग्रेस इस बार गठबंधन में केवल जूनियर पार्टनर की भूमिका स्वीकार करने के मूड में नहीं दिख रही है. 170 सीटों का दावा और विभिन्न नेताओं को लेकर नरम रुख यह संकेत देता है कि पार्टी अपनी स्वतंत्र राजनीतिक पहचान को मजबूत करते हुए गठबंधन में बराबरी की स्थिति चाहती है.

2027 की राजनीति की दिशा तय करेंगे अगले कदम

उत्तर प्रदेश की राजनीति में अगले कुछ महीने बेहद महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं. सीट बंटवारे, गठबंधन की संभावनाओं और राजनीतिक समीकरणों को लेकर होने वाली बातचीत 2027 के चुनावी मुकाबले की दिशा तय कर सकती है. फिलहाल कांग्रेस ने अपनी रणनीति का संकेत दे दिया है और अब सभी की नजर समाजवादी पार्टी तथा अन्य संभावित सहयोगियों की प्रतिक्रिया पर टिकी हुई है.