17 साल की लड़की ने कब्रों की सफाई से खड़ा किया लाखों का कारोबार, पढ़ाई छोड़ शुरू किया अनोखा बिजनेस

साउथ अफ्रीका की 17 वर्षीय सुलांद्री कोत्जे ने कब्रों की सफाई और मरम्मत का काम शुरू कर अनोखा कारोबार खड़ा किया। पढ़ाई का खर्च उठाने के लिए शुरू किया गया यह काम आज लाखों की कमाई का जरिया बन चुका है।

17 साल की लड़की ने कब्रों की सफाई से खड़ा किया लाखों का कारोबार, पढ़ाई छोड़ शुरू किया अनोखा बिजनेस

दि राइजिंग न्यूज |1 साउथ अफ्रीका|22 मई 2026

आज के समय में जहां ज्यादातर युवा अच्छी नौकरी और बेहतर करियर की तलाश में संघर्ष कर रहे हैं, वहीं साउथ अफ्रीका की एक 17 वर्षीय लड़की ने ऐसा अनोखा कारोबार शुरू किया है जिसने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। कम उम्र में ही इस लड़की ने ऐसा काम चुना जिसे सुनकर लोग पहले हैरान हुए, लेकिन अब वही काम उसकी पहचान और कमाई का सबसे बड़ा जरिया बन चुका है। साउथ अफ्रीका के फ्री स्टेट इलाके में रहने वाली सुलांद्री कोत्जे ने कब्रों की सफाई और मरम्मत का काम शुरू किया और देखते ही देखते यह छोटा प्रयास एक सफल कारोबार में बदल गया। आज वह अपने इस अनोखे बिजनेस से लाखों रुपए की कमाई कर रही हैं और सोशल मीडिया पर भी तेजी से चर्चा में हैं।

पढ़ाई का खर्च उठाने के लिए शुरू किया काम

सुलांद्री का सपना एक प्रोफेशनल नर्स बनने का था। वह आगे की पढ़ाई करना चाहती थीं, लेकिन पढ़ाई और यूनिवर्सिटी की फीस का खर्च उनके परिवार के लिए आसान नहीं था। ऐसे में उन्होंने कोई सामान्य पार्ट टाइम नौकरी करने के बजाय कुछ अलग करने का फैसला लिया। करीब दो साल पहले सुलांद्री ने अपने आसपास के कब्रिस्तानों की हालत देखी। कई कब्रें झाड़ियों और घास से पूरी तरह ढकी हुई थीं। कुछ कब्रों पर तो इतने वर्षों से सफाई नहीं हुई थी कि वहां लिखे नाम और पहचान तक मिटने लगे थे। यह दृश्य देखकर सुलांद्री को लगा कि मरने के बाद भी लोगों की यादों और उनकी अंतिम जगह का सम्मान होना चाहिए। यहीं से उनके मन में कब्रों की सफाई और देखभाल का विचार आया। शुरुआत में लोगों को यह काम अजीब लगा, लेकिन सुलांद्री ने हार नहीं मानी और अपने विचार को कारोबार में बदलने की ठान ली।

सोशल मीडिया ने बदली जिंदगी

सुलांद्री के इस काम को आगे बढ़ाने में उनके माता-पिता ने बड़ी भूमिका निभाई। उनके पिता और मां ने सोशल मीडिया पर इस सेवा के बारे में जानकारी साझा करनी शुरू की। धीरे-धीरे लोगों का ध्यान इस अनोखी सेवा की ओर गया। सबसे हैरान करने वाली बात यह रही कि शुरुआत के केवल एक महीने के भीतर ही उन्हें कई बड़े ऑर्डर मिलने लगे। लोग अपने परिजनों की कब्रों की सफाई और मरम्मत के लिए उनसे संपर्क करने लगे। आज सुलांद्री करीब 75 कब्रों की नियमित देखरेख करती हैं। इन कब्रों की महीने में दो बार सफाई की जाती है। इसके अलावा कई ग्राहक विशेष अवसरों पर अतिरिक्त सजावट और मरम्मत का काम भी करवाते हैं।

आखिर कैसे होता है पूरा काम

सुलांद्री केवल कब्रों की सफाई ही नहीं करतीं, बल्कि उनकी मरम्मत और सजावट का काम भी संभालती हैं। कब्र की हालत के अनुसार वहां नई मिट्टी डाली जाती है, पत्थर लगाए जाते हैं, सीमेंट का काम किया जाता है और आसपास की घास व गंदगी हटाई जाती है। कई परिवार चाहते हैं कि उनके परिजनों की कब्र हमेशा साफ और सुंदर दिखे। ऐसे में सुलांद्री उनकी जरूरत के हिसाब से अलग-अलग पैकेज तैयार करती हैं। कब्र की स्थिति और काम के अनुसार शुल्क तय किया जाता है। उनकी यह सेवा खासतौर पर उन लोगों के लिए बेहद उपयोगी साबित हो रही है जो अपने शहर या देश से दूर रहते हैं और अपने परिवार के सदस्यों की कब्रों की देखभाल नहीं कर पाते।

ग्राहकों को भेजती हैं तस्वीरें और वीडियो

सुलांद्री अपने काम में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए हर सफाई के बाद कब्रों की तस्वीरें और वीडियो अपने ग्राहकों को भेजती हैं। इससे लोगों को यह भरोसा मिलता है कि उनके प्रियजनों की कब्र की सही तरीके से देखभाल की जा रही है। कई ग्राहक इन तस्वीरों को देखकर भावुक हो जाते हैं क्योंकि लंबे समय बाद उन्हें अपने परिजनों की कब्र साफ और व्यवस्थित दिखाई देती है। यही वजह है कि उनकी सेवा की मांग लगातार बढ़ती जा रही है।

पूरा परिवार बन गया कारोबार का हिस्सा

सुलांद्री का यह बिजनेस अब पूरे परिवार का काम बन चुका है। उनके पिता कारोबार का प्रबंधन संभालते हैं और जरूरत का सामान लेकर आते हैं। उनकी मां हिसाब-किताब और ग्राहकों से जुड़ी जिम्मेदारियां निभाती हैं। इसके अलावा परिवार के अन्य सदस्य भी सप्ताहांत में इस काम में मदद करते हैं। कब्रों की सफाई, रंगाई, मरम्मत और सजावट जैसे कामों में पूरा परिवार साथ मिलकर मेहनत करता है। परिवार का कहना है कि शुरुआत में लोगों ने उनके काम का मजाक उड़ाया था, लेकिन अब वही लोग उनकी मेहनत और सफलता की तारीफ करते हैं।

काम के दौरान मिला परिवार का इतिहास

इस कारोबार के दौरान सुलांद्री के परिवार के साथ एक भावुक घटना भी हुई। सफाई के दौरान उनकी मां को एक पुरानी कब्र मिली जिस पर उनके परदादा का नाम लिखा हुआ था। जब परिवार ने इस बारे में जानकारी जुटाई तो पता चला कि वह कब्र वास्तव में उनके ही परदादा की थी, जिनका जन्म 1889 में हुआ था और निधन 1971 में हुआ था। इसके बाद परिवार ने उस कब्र की देखभाल की जिम्मेदारी भी खुद संभाल ली। इस घटना ने सुलांद्री और उनके परिवार को अपने इतिहास और जड़ों से जोड़ दिया।

युवाओं के लिए बनी प्रेरणा

सुलांद्री की कहानी आज लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा बन चुकी है। उन्होंने साबित कर दिया कि कोई भी काम छोटा या बड़ा नहीं होता। अगर सोच अलग हो और मेहनत करने का जज्बा हो तो किसी भी साधारण काम को सफल कारोबार में बदला जा सकता है। जहां कई युवा केवल पारंपरिक नौकरी के पीछे भागते हैं, वहीं सुलांद्री ने समाज की एक अनदेखी जरूरत को पहचाना और उसे अपने व्यवसाय का रूप दे दिया। यही वजह है कि आज उनका नाम सोशल मीडिया और समाचारों में तेजी से वायरल हो रहा है।