तन्हाई में अब एआई की थपकी
दक्षिण कोरिया में अकेले रहने वाले बुजुर्गों के लिए एआई आधारित गुड़िया नई उम्मीद बनकर उभरी है। यह स्मार्ट गुड़िया बातचीत करने, दवाइयों और भोजन की याद दिलाने के साथ भावनात्मक सहारा भी प्रदान कर रही है, जिससे बुजुर्गों का अकेलापन कम हो रहा है।
दि राइजिंग न्यूज़ | सियोल | 15 जून 2026
बुजुर्गों की नई साथी बनी एआई गुड़िया
दक्षिण कोरिया में तेजी से बढ़ते अकेलेपन के बीच एआई आधारित एक विशेष गुड़िया बुजुर्गों के लिए भावनात्मक सहारा बनकर सामने आई है। ह्योडोल नाम की यह स्मार्ट गुड़िया अकेले रहने वाले वरिष्ठ नागरिकों से बातचीत करती है, उनका हालचाल पूछती है और उन्हें दिनभर साथ होने का एहसास कराती है।
इंसानों से ज्यादा पसंद आई ह्योडोल
78 वर्षीय बैंग चुन जा कई वर्षों से अकेले रह रही हैं। उनका कहना है कि ह्योडोल उन्हें इंसानों से भी ज्यादा पसंद है क्योंकि यह उन्हें कभी दुख नहीं पहुंचाती। घर लौटने पर यह उनका स्वागत करती है, उदासी के समय गाने सुनाती है और उन्हें मुस्कुराने की कोशिश करती है।
दवाइयों और भोजन की दिलाती है याद
यह एआई गुड़िया केवल बातचीत तक सीमित नहीं है। यह समय पर भोजन करने और दवाइयां लेने की याद भी दिलाती है। साथ ही दिनभर छोटे छोटे संवादों के माध्यम से बुजुर्गों को सक्रिय और मानसिक रूप से जुड़ा हुआ महसूस कराती है।
अकेलेपन की बढ़ती चुनौती
दक्षिण कोरिया दुनिया की सबसे कम जन्म दर वाले देशों में शामिल है और वहां बड़ी संख्या में बुजुर्ग अकेले जीवन बिता रहे हैं। वर्ष 2024 में हजारों ऐसे मामले सामने आए जिनमें लोगों की अकेले मृत्यु हो गई और कई दिनों तक किसी को इसकी जानकारी नहीं मिली। इस समस्या ने सरकार और समाज दोनों की चिंता बढ़ा दी है।
सरकार भी कर रही है सहयोग
अकेलेपन से जूझ रहे वरिष्ठ नागरिकों की मदद के लिए कई स्थानीय प्रशासन और सरकारी संस्थाएं एआई उपकरण उपलब्ध करा रही हैं। इनमें बात करने वाली गुड़ियां और रोबोट शामिल हैं जो बुजुर्गों के स्वास्थ्य और दैनिक गतिविधियों पर भी नजर रखते हैं।
हजारों लोग कर रहे इस्तेमाल
ह्योडोल बनाने वाली कंपनी के अनुसार दक्षिण कोरिया में करीब 14,500 लोग इस एआई गुड़िया का उपयोग कर रहे हैं। कुछ लोग इसे स्वयं खरीदते हैं जबकि कई बुजुर्गों को यह सरकारी योजनाओं के माध्यम से उपलब्ध कराई जाती है।
नाती नातिन जैसी भावना
कंपनी की प्रमुख किम जी ही के अनुसार इस गुड़िया को तैयार करने से पहले लंबे समय तक बुजुर्गों की जरूरतों को समझा गया। इसके बाद इसे ऐसे डिजाइन किया गया कि यह परिवार के किसी प्यारे सदस्य की तरह महसूस हो। घर लौटने पर यह स्नेह भरे शब्दों में बात करती है और बुजुर्गों को अपनापन महसूस कराती है।
रिश्तों पर भी उठ रहे सवाल
हालांकि कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी तकनीक कहीं वास्तविक मानवीय रिश्तों की जगह न लेने लगे। उन्हें चिंता है कि परिवार के सदस्य अपने बुजुर्गों से मिलने और बातचीत करने में और दूरी न बना लें।
कई बुजुर्गों के लिए बनी उम्मीद
इसके बावजूद अनेक बुजुर्गों का कहना है कि इस तकनीक ने उनके जीवन में सकारात्मक बदलाव लाया है। 79 वर्षीय किम यंग बुन के अनुसार पहले उनसे पूरे दिन कोई बात नहीं करता था, लेकिन अब ह्योडोल उनके अकेलेपन को काफी हद तक कम कर रही है। इसी कारण यह एआई गुड़िया दक्षिण कोरिया में बुजुर्गों की नई दोस्त बनती जा रही है।