चुनौतियों को पछाड़ रफ्तार में भारतीय अर्थव्यवस्था

अमेरिका के टैरिफ दबाव, ईरान युद्ध और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के बावजूद भारत ने वित्त वर्ष 2025-26 में 7.7 प्रतिशत की जीडीपी वृद्धि दर्ज कर सभी प्रमुख अनुमानों को पीछे छोड़ दिया। चौथी तिमाही में 7.8 प्रतिशत वृद्धि दर के साथ भारत दुनिया की सबसे तेज गति से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में अपनी स्थिति मजबूत बनाए हुए है।

चुनौतियों को पछाड़ रफ्तार में भारतीय अर्थव्यवस्था

दि राइजिंग न्यूज़। नई दिल्ली। 06 जून 2026

वैश्विक संकटों के बीच भारत ने दिखाई मजबूती, जीडीपी वृद्धि दर 7.7 प्रतिशत रही

नई दिल्ली। वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं, अमेरिका के टैरिफ दबाव और ईरान युद्ध जैसे अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था ने वित्त वर्ष 2025-26 में उम्मीद से बेहतर प्रदर्शन किया है। सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार देश की वास्तविक सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) वृद्धि दर 7.7 प्रतिशत दर्ज की गई है, जबकि जनवरी-मार्च 2026 की चौथी तिमाही में यह वृद्धि दर 7.8 प्रतिशत रही। यह आंकड़े अधिकांश घरेलू और अंतरराष्ट्रीय संस्थानों के अनुमानों से बेहतर हैं।  यह प्रदर्शन ऐसे समय में सामने आया है जब वैश्विक अर्थव्यवस्था कई चुनौतियों से जूझ रही है। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव, कच्चे तेल की ऊंची कीमतों और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर दबाव के बावजूद भारत की आर्थिक गतिविधियां मजबूत बनी हुई हैं।

चौथी तिमाही में भी बरकरार रही मजबूती

मार्च 2026 में समाप्त हुई चौथी तिमाही के दौरान भारतीय अर्थव्यवस्था ने 7.8 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की। हालांकि पिछली तिमाही में वृद्धि दर 8 प्रतिशत थी, लेकिन वैश्विक परिस्थितियों को देखते हुए इसे बेहद मजबूत प्रदर्शन माना जा रहा है। सरकार ने फरवरी में पूरे वित्त वर्ष के लिए 7.6 प्रतिशत वृद्धि का अनुमान लगाया था, जबकि वास्तविक आंकड़ा 7.7 प्रतिशत रहा।

देश की अर्थव्यवस्था का आकार बढ़ा

वित्त वर्ष 2025-26 में वास्तविक जीडीपी बढ़कर 323.12 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गई, जबकि पिछले वित्त वर्ष 2024-25 में यह 299.89 लाख करोड़ रुपये थी। वहीं देश की नाममात्र जीडीपी बढ़कर 346.36 लाख करोड़ रुपये हो गई, जो पिछले वित्त वर्ष में 318.07 लाख करोड़ रुपये थी।

सेवा और विनिर्माण क्षेत्र बने विकास के इंजन

देश की आर्थिक वृद्धि में सेवा क्षेत्र और विनिर्माण क्षेत्र की महत्वपूर्ण भूमिका रही। वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान व्यापार, होटल, परिवहन, संचार, प्रसारण, भंडारण, वित्तीय सेवाएं, रियल एस्टेट और पेशेवर सेवाओं में दोहरे अंकों की वृद्धि दर्ज की गई। इसके साथ ही विनिर्माण क्षेत्र ने भी मजबूत प्रदर्शन करते हुए आर्थिक विकास को गति प्रदान की। कृषि और मत्स्य पालन जैसे प्राथमिक क्षेत्रों में 3.2 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। वहीं द्वितीयक क्षेत्र में 8.8 प्रतिशत और तृतीयक यानी सेवा क्षेत्र में 9.3 प्रतिशत की वृद्धि देखी गई।

निवेश और खपत में आई तेजी

आर्थिक वृद्धि का एक बड़ा आधार घरेलू मांग और निवेश रहा। निजी अंतिम उपभोग व्यय तथा सकल स्थायी पूंजी निर्माण दोनों में 7.5 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि दर्ज की गई। इससे स्पष्ट है कि देश में उपभोक्ता खर्च और निजी निवेश दोनों मजबूत बने हुए हैं। निजी निवेश में उल्लेखनीय बढ़ोतरी ने अर्थव्यवस्था को अतिरिक्त गति प्रदान की।

बदला गया आधार वर्ष

सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह आंकड़े नई जीडीपी श्रृंखला के आधार पर तैयार किए गए हैं, जिसमें आधार वर्ष को बदलकर 2022-23 कर दिया गया है। नई श्रृंखला का उद्देश्य भारतीय अर्थव्यवस्था की वर्तमान संरचना और गतिविधियों को अधिक सटीक तरीके से प्रदर्शित करना है।

सभी प्रमुख अनुमानों को पीछे छोड़ा

भारतीय अर्थव्यवस्था की वास्तविक वृद्धि दर ने कई प्रमुख संस्थानों के अनुमानों को पीछे छोड़ दिया।

  • भारतीय रिजर्व बैंक ने 6.8 प्रतिशत वृद्धि का अनुमान लगाया था।
  • भारतीय स्टेट बैंक के शोध विभाग ने 7.5 प्रतिशत वृद्धि का अनुमान जताया था।
  • अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष ने 7.3 प्रतिशत वृद्धि दर का अनुमान दिया था।
  • रेटिंग एजेंसी मूडीज ने भारत की वृद्धि दर 6 प्रतिशत रहने की संभावना व्यक्त की थी।

इन सभी अनुमानों के मुकाबले भारत की वास्तविक वृद्धि दर 7.7 प्रतिशत दर्ज की गई, जो देश की आर्थिक मजबूती को दर्शाती है।

दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं से आगे भारत

वर्ष 2026 में दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में भारत सबसे तेज गति से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है।

  • अमेरिका की अनुमानित वृद्धि दर लगभग 2.5 प्रतिशत।
  • चीन का विकास लक्ष्य 4.5 से 5 प्रतिशत के बीच।
  • पाकिस्तान की वृद्धि दर 3.7 प्रतिशत।
  • जापान की अनुमानित वृद्धि दर 0.7 प्रतिशत।

इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि भारत वैश्विक चुनौतियों के बीच भी अपनी विकास यात्रा को मजबूती से आगे बढ़ा रहा है। भारत की आर्थिक बुनियाद मजबूत बनी हुई है, लेकिन आने वाले समय में वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव, कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक परिस्थितियां नई चुनौतियां पैदा कर सकती हैं। इसके बावजूद मजबूत घरेलू मांग, बढ़ता निवेश, सेवा क्षेत्र का विस्तार और सरकारी सुधार भारत की विकास दर को सहारा देते रहेंगे।