ईरानी नेताओं की हत्या की कथित साजिश!

ईरान और इजरायल के बीच जारी तनाव के बीच सामने आई इस रिपोर्ट ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में नई चर्चा छेड़ दी है। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि शांति वार्ता के दौरान ईरान के प्रमुख नेताओं को कथित रूप से निशाना बनाने की योजना बनाई गई थी। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और तीनों देशों की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया भी सामने नहीं आई है।

ईरानी नेताओं की हत्या की कथित साजिश!

दि राइजिंग न्यूज | इस्लामाबाद | 3 जुलाई 2026

इजरायल और ईरान के बीच लंबे समय से जारी तनाव के बीच एक नई रिपोर्ट ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हलचल मचा दी है। अमेरिकी समाचार पत्र की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि जब ईरान और अमेरिका के बीच मध्यस्थों के माध्यम से युद्धविराम और शांति स्थापना को लेकर बातचीत चल रही थी, उसी समय ईरान के प्रमुख वार्ताकारों को कथित रूप से निशाना बनाने की योजना तैयार की गई थी। रिपोर्ट के अनुसार यह जानकारी अमेरिका के वर्तमान और पूर्व अधिकारियों के हवाले से सामने आई है। हालांकि इस पूरे मामले की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है और इजरायल, अमेरिका तथा ईरान की ओर से भी कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया जारी नहीं की गई है।


शांति वार्ता के दौरान बढ़ी चिंता

रिपोर्ट के अनुसार अप्रैल माह में जब युद्धविराम और अंतरिम शांति समझौते को लेकर बातचीत आगे बढ़ रही थी, उसी दौरान अमेरिका को ईरान के दो शीर्ष नेताओं की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता सताने लगी थी। विदेश मंत्री अब्बास अराघची और संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाकर गालिबाफ उस समय वार्ता प्रक्रिया के सबसे महत्वपूर्ण चेहरों में शामिल थे। आशंका जताई गई कि यदि इन नेताओं पर हमला होता है तो पूरी शांति प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है और दोनों देशों के बीच तनाव और अधिक बढ़ सकता है।


अन्य देशों के माध्यम से ईरान को दी गई चेतावनी

रिपोर्ट में कहा गया है कि संभावित खतरे को देखते हुए अमेरिका ने क्षेत्र के कुछ सहयोगी देशों से ईरान को सुरक्षा संबंधी चेतावनी पहुंचाने का आग्रह किया था। अमेरिकी अधिकारियों को आशंका थी कि यदि वार्ता में शामिल किसी प्रमुख नेता पर हमला होता है तो उसका सीधा असर कूटनीतिक प्रयासों पर पड़ेगा। इसी कारण सुरक्षा एजेंसियों ने समय रहते संभावित खतरे की जानकारी साझा करने की कोशिश की ताकि किसी अप्रिय घटना को रोका जा सके।


ईरानी नेतृत्व को निशाना बनाने का दावा

समाचार पत्र की रिपोर्ट के अनुसार ईरान के शीर्ष नेतृत्व को निशाना बनाना कथित रूप से सैन्य रणनीति का एक हिस्सा माना गया था। दावा किया गया है कि युद्ध की शुरुआत से ही ईरान के महत्वपूर्ण राजनीतिक और सुरक्षा अधिकारियों पर विशेष नजर रखी जा रही थी। रिपोर्ट में यह भी उल्लेख है कि कई वरिष्ठ नेताओं के नाम संभावित लक्ष्य सूची में शामिल बताए गए, हालांकि इन दावों की किसी स्वतंत्र संस्था ने पुष्टि नहीं की है।


कई वरिष्ठ नेताओं के नाम बताए गए

रिपोर्ट में कहा गया है कि कथित लक्ष्य सूची में केवल अब्बास अराघची और मोहम्मद बाकर गालिबाफ ही नहीं बल्कि ईरान के वरिष्ठ राष्ट्रीय सुरक्षा अधिकारी अली लारीजानी तथा पूर्व विदेश मंत्री कमाल खराजी जैसे नेताओं के नाम भी शामिल बताए गए थे। रिपोर्ट के अनुसार इन नेताओं को ईरान की रणनीतिक निर्णय प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। इसी कारण इनकी सुरक्षा को लेकर लगातार चिंता बनी हुई थी।


वार्ता में निभा रहे थे महत्वपूर्ण भूमिका

अब्बास अराघची और मोहम्मद बाकर गालिबाफ युद्धविराम, क्षेत्रीय स्थिरता और स्थायी शांति को लेकर चल रही बातचीत में ईरान का प्रतिनिधित्व कर रहे थे। रिपोर्ट के अनुसार यही कारण था कि दोनों नेताओं को कथित रूप से विशेष लक्ष्य बनाया गया। एक अमेरिकी अधिकारी के हवाले से यह भी दावा किया गया कि जब इस संबंध में जानकारी सामने आई तो अमेरिका ने इजरायल से ऐसा कोई कदम नहीं उठाने का आग्रह किया था जिससे शांति वार्ता प्रभावित हो सकती थी।


पाकिस्तान यात्रा के दौरान भी बना रहा खतरा

रिपोर्ट में दावा किया गया है कि अप्रैल माह में जब ईरानी प्रतिनिधिमंडल पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद पहुंचा था, तब भी सुरक्षा एजेंसियां पूरी तरह सतर्क थीं। बताया गया कि यात्रा के दौरान संभावित हमले की आशंका के कारण विशेष सुरक्षा व्यवस्था की गई थी। ईरानी अधिकारियों को डर था कि यात्रा के दौरान किसी भी समय हमला किया जा सकता है, जिससे क्षेत्रीय हालात और अधिक गंभीर हो सकते हैं।


वापसी के समय मिला हमले का संकेत

रिपोर्ट के अनुसार पाकिस्तान से लौटते समय ईरानी प्रतिनिधिमंडल के विमान को सुरक्षा एजेंसियों की ओर से संभावित खतरे की सूचना दी गई। दावा किया गया कि खुफिया जानकारी के आधार पर आशंका व्यक्त की गई थी कि इजरायली लड़ाकू विमान ईरानी हवाई क्षेत्र की ओर बढ़ रहे हैं। इस सूचना के बाद सुरक्षा एजेंसियों ने तत्काल एहतियाती कदम उठाए और पूरे घटनाक्रम पर कड़ी निगरानी रखी।


मशहद में उतारा गया विमान

संभावित खतरे को देखते हुए प्रतिनिधिमंडल के विमान को तेहरान ले जाने के बजाय मशहद हवाई अड्डे पर उतारा गया। इसके बाद सभी अधिकारी सड़क मार्ग से कई घंटे की यात्रा करके राजधानी पहुंचे। रिपोर्ट में कहा गया है कि यह फैसला पूरी तरह सुरक्षा कारणों से लिया गया था। हालांकि इस पूरे घटनाक्रम की किसी स्वतंत्र स्रोत से पुष्टि नहीं हुई है और संबंधित देशों ने भी इस पर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है।


आधिकारिक पुष्टि नहीं

इस पूरे मामले में सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि रिपोर्ट में किए गए सभी दावे अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से बताए गए हैं। अब तक इजरायल, अमेरिका और ईरान की सरकारों की ओर से इन दावों की आधिकारिक पुष्टि या खंडन नहीं किया गया है। इसलिए इन दावों को फिलहाल स्वतंत्र रूप से सत्यापित नहीं माना जा सकता।