पापा बचा लो कहकर थम गई आवाज
लखनऊ के अलीगंज अग्निकांड में जान गंवाने वाले शहजान की आखिरी कॉल ने पूरे परिवार को झकझोर दिया। आग में फंसे बेटे ने फोन पर अपने पिता से मदद की गुहार लगाई, लेकिन कुछ ही देर बाद उसकी आवाज हमेशा के लिए खामोश हो गई। इस दर्दनाक घटना ने हादसे की भयावहता को और गहरा कर दिया है।
दि राइजिंग न्यूज़ | लखनऊ | 23 जून 2026
आखिरी कॉल ने बदल दी जिंदगी
लखनऊ के अलीगंज स्थित पुरनिया इलाके में हुए भीषण अग्निकांड के बाद एक ऐसी कहानी सामने आई है जिसने हर किसी की आंखें नम कर दी हैं। हादसे में जान गंवाने वाले शहजान की आखिरी फोन कॉल आज भी उनके पिता के कानों में गूंज रही है।परिजनों के अनुसार आग में फंसने के बाद शहजान ने अपने पिता को फोन किया था। उस समय उसकी आवाज में डर और बेबसी साफ झलक रही थी।
पापा बचा लो कहकर लगाई गुहार
बताया जा रहा है कि शहजान ने फोन पर अपने पिता से कहा, “पापा बचा लो।” इमारत के भीतर तेजी से फैल रहे धुएं और आग के बीच वह अपनी जान बचाने की कोशिश कर रहा था।पिता ने बेटे को हिम्मत बंधाने की कोशिश की और उसे सुरक्षित स्थान पर जाने के लिए कहा, लेकिन हालात लगातार बिगड़ते जा रहे थे।
फोन पर सुनते रहे बेटे की चीखें
परिवार के मुताबिक पिता फोन पर बेटे की आवाज सुन रहे थे, लेकिन चाहकर भी उसकी मदद नहीं कर पा रहे थे। आग और धुएं ने इमारत के भीतर फंसे लोगों के लिए हालात बेहद कठिन बना दिए थे।कुछ देर बाद फोन पर बातचीत टूट गई और फिर वह आवाज कभी सुनाई नहीं दी। यही पल परिवार के लिए जिंदगी का सबसे बड़ा दुख बन गया।
बेटे को नहीं बचा पाने का दर्द
शहजान के पिता का कहना है कि वह अपने बेटे की आवाज कभी नहीं भूल पाएंगे। उन्हें आज भी वह आखिरी कॉल और मदद की गुहार याद आती है।उन्होंने कहा कि एक पिता के लिए इससे बड़ा दुख क्या हो सकता है कि उसका बेटा उसे पुकारता रहे और वह उसकी मदद न कर सके।
परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़
हादसे के बाद शहजान के घर में मातम पसरा हुआ है। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है और पूरे परिवार को अब भी यकीन नहीं हो रहा कि शहजान उनके बीच नहीं रहा।रिश्तेदारों और परिचितों का घर पर लगातार आना-जाना लगा हुआ है, लेकिन परिवार के दुख को कम करना किसी के लिए संभव नहीं है।
जिम्मेदारों पर कार्रवाई की मांग
परिवार ने हादसे के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि यदि सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम होते तो शायद कई जिंदगियां बचाई जा सकती थीं।परिजन चाहते हैं कि जांच निष्पक्ष हो और दोषियों को ऐसी सजा मिले जिससे भविष्य में किसी अन्य परिवार को इस तरह का दर्द न सहना पड़े।
एक कॉल जो हमेशा याद रहेगी
शहजान की आखिरी पुकार अब उसके परिवार की सबसे दर्दनाक याद बन चुकी है। “पापा बचा लो” के शब्द पिता के दिल और दिमाग में हमेशा के लिए दर्ज हो गए हैं।लखनऊ अग्निकांड ने जहां कई परिवारों के सपने छीन लिए, वहीं शहजान की यह आखिरी कॉल उस त्रासदी की सबसे मार्मिक कहानियों में से एक बन गई है।