यूएस ईरान डील पर इजरायल का साया
अमेरिका और ईरान के बीच प्रस्तावित शांति समझौते का मसौदा सामने आने के बीच इजरायल के लेबनान पर हमले ने तनाव बढ़ा दिया है। परमाणु कार्यक्रम, फ्रीज फंड, तेल व्यापार और होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर बड़ी सहमति बनने की खबरों के बीच समझौते के भविष्य पर सवाल खड़े हो गए हैं।
दि राइजिंग न्यूज़ | तेहरान/वॉशिंगटन | 15 जून 2026
शांति समझौते के बीच बढ़ा तनाव
अमेरिका और ईरान के बीच कई महीनों से चल रही बातचीत अब निर्णायक चरण में पहुंचती दिखाई दे रही है। दोनों देशों के बीच प्रस्तावित शांति समझौते का मसौदा सामने आया है, जिसमें परमाणु कार्यक्रम, तेल कारोबार, फ्रीज किए गए अरबों डॉलर और होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर सहमति बनने का दावा किया गया है। हालांकि इसी बीच इजरायल द्वारा लेबनान की राजधानी बेरूत के आसपास किए गए हमलों ने पूरे घटनाक्रम को नया मोड़ दे दिया है।
इजरायली हमले पर ट्रंप की नाराजगी
इजरायली सेना ने दावा किया कि हमला हिज्बुल्लाह के ठिकानों को निशाना बनाकर किया गया था। इस कार्रवाई के बाद ईरान में नाराजगी बढ़ गई और प्रस्तावित समझौते पर संकट के बादल मंडराने लगे। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी इस हमले पर असहमति जताते हुए कहा कि ऐसी कार्रवाई नहीं होनी चाहिए थी। वहीं ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने बातचीत को ही संकट से निकलने का सबसे प्रभावी रास्ता बताया।
परमाणु हथियार नहीं बनाने का वादा
प्रस्तावित मसौदे के अनुसार ईरान ने यह आश्वासन दिया है कि वह न तो परमाणु हथियार बनाएगा और न ही किसी अन्य माध्यम से उन्हें हासिल करने का प्रयास करेगा। इसके साथ ही ईरान के उच्च स्तर पर संवर्धित यूरेनियम के संवर्धन को कम करने पर भी सहमति बनने की बात कही गई है। इस प्रक्रिया की तकनीकी रूपरेखा अगले साठ दिनों के भीतर तय किए जाने की संभावना है।
फ्रीज किए गए अरबों डॉलर मिल सकते हैं
समझौते का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा ईरान के फ्रीज किए गए धन को लेकर है। रिपोर्टों के अनुसार अमेरिका लगभग पच्चीस अरब डॉलर जारी करने पर सहमत हो सकता है। इसके लिए प्रत्यक्ष वित्तीय सहायता, क्षेत्रीय सहयोग और वित्तीय क्रेडिट व्यवस्था जैसे विकल्पों पर विचार किया जा रहा है। इससे ईरान की आर्थिक स्थिति को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।
तेल व्यापार को मिल सकती है राहत
मसौदे में अमेरिका द्वारा ईरान पर लगाए गए कुछ तेल प्रतिबंधों में अस्थायी छूट देने का भी प्रावधान बताया गया है। यदि यह लागू होता है तो ईरान अंतरराष्ट्रीय बाजार में दोबारा तेल निर्यात कर सकेगा और उससे प्राप्त राजस्व का उपयोग अपनी अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में कर पाएगा।
होर्मुज जलडमरूमध्य पर बड़ा फैसला
दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में शामिल होर्मुज जलडमरूमध्य भी इस समझौते का अहम हिस्सा है। प्रस्तावित व्यवस्था के तहत ईरान सभी व्यावसायिक जहाजों के लिए इस मार्ग को तत्काल खोल देगा। इसके बदले अमेरिका ईरानी जहाजों और बंदरगाहों पर लागू नौसैनिक नाकेबंदी को समाप्त करेगा। इससे वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और समुद्री व्यापार को स्थिरता मिलने की संभावना है।
ईरान के भीतर भी विरोध
हालांकि समझौते को लेकर ईरान के भीतर सभी पक्ष एकमत नहीं हैं। कुछ कट्टरपंथी समूहों और राजनीतिक धड़ों ने इसकी शर्तों और समय को लेकर सवाल उठाए हैं। उनका मानना है कि अमेरिका पर पूरी तरह भरोसा नहीं किया जा सकता और किसी भी समझौते में राष्ट्रीय हित सर्वोपरि रहने चाहिए।
पश्चिम एशिया की बड़ी कूटनीतिक पहल
यदि यह समझौता अंतिम रूप ले लेता है तो यह हाल के वर्षों में पश्चिम एशिया की सबसे महत्वपूर्ण कूटनीतिक उपलब्धियों में शामिल होगा। इससे अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम होने के साथ वैश्विक ऊर्जा बाजार, समुद्री व्यापार मार्गों और क्षेत्रीय सुरक्षा व्यवस्था पर भी व्यापक प्रभाव पड़ सकता है।