अहमदाबाद विमान हादसे के एक साल बाद भी अधूरा इंसाफ
अहमदाबाद से लंदन जा रही एअर इंडिया फ्लाइट हादसे को एक साल पूरा हो गया है। मुआवजा मिलने के बावजूद पीड़ित परिवार अपनों को खोने के दर्द से बाहर नहीं निकल पाए हैं और जांच रिपोर्ट का इंतजार कर रहे हैं।
दि राइजिंग न्यूज़ | अहमदाबाद | 12 जून 2026
12 जून 2025 को अहमदाबाद से लंदन जा रही एअर इंडिया की फ्लाइट ने उड़ान भरी और कुछ ही सेकेंड बाद भीषण हादसे का शिकार हो गई। इस दुर्घटना में 260 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई थी। शुक्रवार को इस दर्दनाक हादसे को एक साल पूरा हो गया है।एक साल बाद भी पीड़ित परिवारों के जख्म ताजा हैं। मुआवजा मिला, जांच शुरू हुई, लेकिन जो लोग चले गए उनकी कमी आज भी परिवारों की जिंदगी में खालीपन बनकर मौजूद है। परिजनों के सवाल अब भी वही हैं कि आखिर हादसा क्यों हुआ, गलती किसकी थी और जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई कब होगी।
मुआवजा मिला लेकिन दर्द कम नहीं हुआ
अहमदाबाद विमान हादसे के बाद टाटा समूह और एअर इंडिया की ओर से पीड़ित परिवारों को मुआवजा दिया गया। सरकार ने भी जांच शुरू की, लेकिन परिवारों का कहना है कि पैसे से अपनों की जगह नहीं भरी जा सकती।पीड़ित परिवार चाहते हैं कि हादसे की पूरी सच्चाई सामने आए। उनका कहना है कि ब्लैक बॉक्स की जांच कहां तक पहुंची, इसकी जानकारी भी उन्हें नहीं दी गई है।हादसे वाली जगह पर मेडिकल छात्रों के लिए हॉस्टल बनाने की योजना को मंजूरी दी गई है, लेकिन कई परिवारों की मांग है कि वहां उनके अपनों की याद में एक स्मारक बनाया जाए, ताकि आने वाली पीढ़ियां इस हादसे को याद रख सकें।
भावेश मोदी का परिवार आज भी सदमे में
अहमदाबाद के भावेश मोदी इस हादसे में जान गंवाने वालों में शामिल थे। भावेश लंदन में रहते थे, लेकिन पिछले तीन चार साल से अपनी बहन सुनीता और मां रतन बा के साथ अहमदाबाद में रह रहे थे।उन्होंने अपने करियर से ब्रेक लिया था और परिवार का सहारा बने हुए थे। वह अपनी बहन के बच्चों जय और फोरम को अपने बच्चों की तरह मानते थे।भावेश की बहन सुनीता बताती हैं कि हादसे के बाद शुरुआती छह महीने उनकी जिंदगी बेहद मुश्किल रही। उन्हें नींद नहीं आती थी और दवाइयों का भी असर नहीं होता था। पूरा साल मानसिक परेशानी में बीता।
विजय रुपाणी के परिवार ने बनाई यादों को जिंदा रखने की कोशिश
गुजरात के पूर्व मुख्यमंत्री विजय रुपाणी भी इस विमान हादसे में मारे गए थे। वह अपनी बेटी से मिलने लंदन जा रहे थे।उनके पीछे पत्नी अंजलीबेन, बेटा रुषभ, बहू और पोती रह गए हैं। बेटे रुषभ रुपाणी का कहना है कि पिता को खोने का दर्द कभी खत्म नहीं हो सकता।उन्होंने कहा कि उनके पिता ने हमेशा लोगों की सेवा को प्राथमिकता दी, चाहे वह मुख्यमंत्री रहे हों या सामान्य कार्यकर्ता।परिवार ने विजय रुपाणी की याद में एक स्मारक बनाया है, जहां गरीब और जरूरतमंद लोगों की मदद करने का प्रयास किया जाएगा।
परवेज वोहरा के परिवार का दर्द
गुजरात के खेड़ा जिले के ठासरा गांव के रहने वाले परवेज वोहरा भी इस हादसे में मारे गए थे। वह पिछले चार साल से लंदन में रह रहे थे।हादसे से सिर्फ 10 दिन पहले वह अपनी पांच साल की बेटी के साथ भारत आए थे। वह दांतों के इलाज और माता-पिता से मिलने के बाद वापस लंदन जा रहे थे। उसी फ्लाइट में उनकी, उनकी बेटी और उनकी मौसी की मौत हो गई।परवेज के भाई रोमिल वोहरा ने उन्हें एयरपोर्ट छोड़ा था। कुछ किलोमीटर दूर जाने के बाद उन्हें विमान हादसे की खबर मिली।कोविड के दौरान अहमदाबाद सिविल अस्पताल में सेवा देने के कारण रोमिल को शव गृह के अंदर जाने का मौका मिला। उन्होंने बताया कि वहां का दृश्य बेहद दर्दनाक था।
रोमिल ने बताया कि उन्होंने पायलट सुमित सभरवाल का शव भी देखा। उनका कहना था कि , लेकिन जब मिला तो वह टूटा हुआ था।उनकी मांग है कि ब्लैक बॉक्स की जांच पूरी पारदर्शिता के साथ हो और अगर पूरी रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की जा सकती तो कम से कम पीड़ित परिवारों के वकीलों को इसकी जानकारी दी जाए।
फैजान के परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़
दीव के दगाची गांव के रहने वाले फैजान भी इस हादसे में मारे गए थे। बचपन से उनका पालन-पोषण उनके नाना-नानी ने किया था।2017 में वह अपने नाना के साथ लंदन चले गए थे। हादसे से कुछ महीने पहले ही उनकी शादी हुई थी।6 जून 2025 को वह आठ दिन की छुट्टी लेकर दीव आए थे। ईद से पहले उन्हें वापस जाना था। नानी ने रुकने के लिए कहा, लेकिन वह नहीं रुके और 12 जून को उसी फ्लाइट में सवार हो गए।हादसे की खबर ने उनकी नानी को गहरा सदमा दिया। धीरे-धीरे उनकी तबीयत खराब होती गई और अब वह कोमा में हैं। फैजान की पत्नी भी इस दुख से गुजर रही हैं। परिवार का कहना है कि उन्हें मुआवजे की चिंता नहीं है, उनके लिए सबसे बड़ी तकलीफ यह है कि फैजान अब कभी वापस नहीं आएंगे।
एक साल बाद परिवारों के सवाल कायम
अहमदाबाद विमान हादसे के एक साल बाद भी पीड़ित परिवारों को जांच रिपोर्ट का इंतजार है। वे जानना चाहते हैं कि हादसे की असली वजह क्या थी, ब्लैक बॉक्स की जांच में क्या सामने आया और जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई कब होगी। परिवारों की मांग है कि हादसे वाली जगह को सिर्फ निर्माण स्थल न बनाया जाए, बल्कि ऐसा स्थान बनाया जाए जहां उनके अपनों की याद हमेशा बनी रहे। एक साल बीत गया, लेकिन जिन परिवारों ने अपने लोग खोए हैं, उनके लिए समय वहीं रुक गया है।