5 साल में 1.42 लाख करोड़ का बैंक फ्रॉड!

संसद में केंद्र सरकार ने देश की बैंकिंग व्यवस्था को लेकर चौंकाने वाले आंकड़े प्रस्तुत किए हैं। सरकार के अनुसार पिछले पांच वर्षों में बैंकों और वित्तीय संस्थानों में 1.42 लाख करोड़ रुपये से अधिक की धोखाधड़ी सामने आई है। इनमें से अब तक केवल साढ़े चार प्रतिशत राशि की ही वसूली हो सकी है। सरकार ने बताया कि हजारों मामलों में कानूनी कार्रवाई और प्राथमिकी दर्ज की जा चुकी है।

5 साल में 1.42 लाख करोड़ का बैंक फ्रॉड!

दि राइजिंग न्यूज़ | नई दिल्ली | 22 जुलाई 2026

देश की बैंकिंग व्यवस्था को लेकर संसद में पेश किए गए आंकड़ों ने एक बार फिर वित्तीय सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। केंद्र सरकार ने राज्यसभा में जानकारी देते हुए बताया कि पिछले पांच वर्षों के दौरान देश के विभिन्न बैंकों और वित्तीय संस्थानों में 1 लाख 42 हजार 112 करोड़ रुपये से अधिक की बैंक धोखाधड़ी दर्ज की गई है। हैरानी की बात यह है कि इतनी बड़ी राशि में से अब तक केवल 6 हजार 389 करोड़ रुपये, यानी लगभग साढ़े चार प्रतिशत धनराशि ही वापस प्राप्त की जा सकी है। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि शेष राशि की वसूली के लिए कानूनी और प्रशासनिक स्तर पर लगातार कार्रवाई जारी है तथा संबंधित एजेंसियां मामले की निगरानी कर रही हैं।राज्यसभा में पूछे गए एक लिखित प्रश्न के उत्तर में वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने बताया कि यह पूरा आंकड़ा भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा उपलब्ध कराए गए आधिकारिक अभिलेखों पर आधारित है। इन आंकड़ों में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक, निजी बैंक, विदेशी बैंक, लघु वित्त बैंक, भुगतान बैंक, स्थानीय क्षेत्र बैंक तथा सभी प्रमुख वित्तीय संस्थानों को शामिल किया गया है। सरकार का कहना है कि बैंकिंग प्रणाली में पारदर्शिता बढ़ाने और भविष्य में ऐसे मामलों को रोकने के लिए लगातार सुधारात्मक कदम उठाए जा रहे हैं।


पांच वर्षों में बढ़े बैंक धोखाधड़ी के मामले

सरकार द्वारा संसद में रखे गए आंकड़ों के अनुसार वित्तीय वर्ष 2021-22 से लेकर 2025-26 तक बैंक धोखाधड़ी के हजारों मामले सामने आए। इन मामलों में कुल वित्तीय नुकसान 1.42 लाख करोड़ रुपये से अधिक का दर्ज किया गया। यह आंकड़ा देश की बैंकिंग व्यवस्था के लिए गंभीर चिंता का विषय माना जा रहा है क्योंकि इतने बड़े आर्थिक नुकसान का सीधा प्रभाव बैंकिंग प्रणाली, निवेशकों और आम उपभोक्ताओं के विश्वास पर पड़ता है। पिछले कुछ वर्षों में बैंकिंग लेन-देन पूरी तरह डिजिटल होने के कारण वित्तीय अपराधों के तरीके भी अधिक जटिल हो गए हैं। कई मामलों में संगठित गिरोह, फर्जी कंपनियां और अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क का इस्तेमाल कर धन का दुरुपयोग किया जाता है। यही कारण है कि ऐसे मामलों की जांच और धन की वापसी दोनों में काफी समय लग जाता है।


वसूली केवल साढ़े चार प्रतिशत, सरकार ने बताई वजह

सरकार ने संसद में स्वीकार किया कि अब तक कुल धोखाधड़ी की राशि में से केवल 6,389 करोड़ रुपये की ही वसूली हो सकी है। यह कुल नुकसान का लगभग 4.5 प्रतिशत है। सरकार का कहना है कि जिन खातों में धोखाधड़ी हुई है, वहां से धन वापस लाने की प्रक्रिया लगातार जारी रहती है और विभिन्न कानूनों के तहत कार्रवाई की जाती है।सरकारी अधिकारियों के अनुसार बड़े आर्थिक अपराधों में धन की वसूली आसान नहीं होती। कई बार आरोपी जांच शुरू होने से पहले ही धन को अलग-अलग खातों, फर्जी कंपनियों या विदेशों में स्थानांतरित कर देते हैं। इसके अलावा संपत्तियों को बेनामी नामों पर खरीद लेना या आभासी मुद्राओं में निवेश कर देना भी वसूली की प्रक्रिया को जटिल बना देता है।


हजारों लोगों के खिलाफ शुरू हुई कानूनी कार्रवाई

सरकार ने बताया कि सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों ने जानबूझकर कर्ज नहीं चुकाने वालों और धोखाधड़ी में शामिल लोगों के खिलाफ बड़े स्तर पर कार्रवाई की है। अब तक 15,577 वसूली संबंधी मामले विभिन्न न्यायिक और प्रशासनिक मंचों पर दायर किए जा चुके हैं। इसके अतिरिक्त 10,894 मामलों में संपत्ति जब्त करने और ऋण वसूली की विशेष कानूनी प्रक्रिया शुरू की गई है।सरकार ने यह भी बताया कि 7,173 मामलों में प्राथमिकी दर्ज कर जांच एजेंसियों को विस्तृत जांच का जिम्मा सौंपा गया है। इन मामलों में आर्थिक अपराध शाखा, केंद्रीय एजेंसियां तथा अन्य संबंधित संस्थाएं लगातार कार्रवाई कर रही हैं। सरकार का दावा है कि दोषियों की पहचान कर उनकी संपत्तियां जब्त करने और धन वापस लाने का प्रयास तेज किया गया है।


धोखाधड़ी पकड़ने में क्यों लग जाते हैं कई वर्ष

सरकार के अनुसार किसी बड़े बैंक घोटाले का पता चलने और उसे आधिकारिक रूप से धोखाधड़ी घोषित करने में कई बार दो से पांच वर्ष तक का समय लग जाता है। इस दौरान आरोपी विभिन्न माध्यमों से धन को इधर-उधर स्थानांतरित कर देते हैं, जिससे बाद में उसकी पहचान करना और वापस लाना बेहद कठिन हो जाता है।कई मामलों में धन को काल्पनिक कंपनियों के माध्यम से घुमाया जाता है। कुछ आरोपी विदेशों के बैंक खातों का उपयोग करते हैं, जबकि कई मामलों में बेनामी संपत्तियां खरीद ली जाती हैं। इसके अलावा लंबी न्यायिक प्रक्रिया, संपत्तियों की कुर्की में देरी और विभिन्न कानूनी अड़चनें भी धन की वापसी को धीमा कर देती हैं।


बैंकिंग व्यवस्था को सुरक्षित बनाने के लिए सरकार के प्रयास

केंद्र सरकार ने कहा कि बैंकिंग व्यवस्था को अधिक सुरक्षित, पारदर्शी और जवाबदेह बनाने के लिए लगातार सुधार किए जा रहे हैं। आधुनिक तकनीक के माध्यम से संदिग्ध लेन-देन की निगरानी बढ़ाई जा रही है। साथ ही बैंकों को जोखिम प्रबंधन प्रणाली मजबूत करने और समय रहते संदिग्ध खातों की पहचान करने के निर्देश भी दिए गए हैं।सरकार का कहना है कि भविष्य में बैंक धोखाधड़ी के मामलों को रोकने के लिए तकनीकी सुरक्षा, कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित निगरानी प्रणाली और मजबूत नियामकीय व्यवस्था को और प्रभावी बनाया जाएगा। इसके अलावा बैंकों को समय-समय पर सतर्कता संबंधी दिशा-निर्देश भी जारी किए जा रहे हैं।