यूरेनियम समझौते पर सियासत तेज, कांग्रेस ने भाजपा को घेरा

भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच हुए यूरेनियम समझौते को लेकर कांग्रेस और भाजपा के बीच श्रेय लेने की राजनीतिक जंग तेज हो गई है। कांग्रेस ने दावा किया कि इसकी शुरुआत वर्ष 2011 में ही हो चुकी थी, जबकि भाजपा इसे वर्तमान सरकार की बड़ी उपलब्धि बता रही है।

यूरेनियम समझौते पर सियासत तेज, कांग्रेस ने भाजपा को घेरा

दि राइजिंग न्यूज़ | नई दिल्ली | 10 जुलाई 2026

भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच हुए यूरेनियम निर्यात समझौते को लेकर देश की राजनीति में श्रेय लेने की होड़ शुरू हो गई है। भारतीय जनता पार्टी ने इसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व की बड़ी उपलब्धि बताया, जबकि कांग्रेस ने इस दावे को खारिज करते हुए कहा कि इसकी नींव वर्ष 2011 में ही रखी जा चुकी थी। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने भाजपा पर इतिहास को तोड़-मरोड़कर पेश करने का आरोप लगाया है।


यूरेनियम समझौते को लेकर छिड़ा राजनीतिक विवाद

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ऑस्ट्रेलिया दौरे के दौरान दोनों देशों के बीच यूरेनियम निर्यात को लेकर हुए समझौते के बाद राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। भारतीय जनता पार्टी इसे वर्तमान सरकार की बड़ी कूटनीतिक सफलता बता रही है। दूसरी ओर कांग्रेस का कहना है कि इस समझौते का आधार कई वर्ष पहले तैयार हो चुका था। इसी मुद्दे को लेकर दोनों प्रमुख दलों के बीच श्रेय लेने की खुली प्रतिस्पर्धा दिखाई दे रही है।


कांग्रेस ने वर्ष 2011 का किया उल्लेख

कांग्रेस ने दावा किया कि वर्ष 2011 में तत्कालीन ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री जूलिया गिलार्ड ने अपनी पार्टी से भारत को यूरेनियम बेचने की अनुमति प्राप्त कर ली थी। कांग्रेस के अनुसार यह निर्णय भारत-अमेरिका असैन्य परमाणु समझौते के बाद लिया गया था। पार्टी का कहना है कि उस समय दोनों देशों के बीच संबंधों को नई दिशा मिली थी और उसी प्रक्रिया का परिणाम आज का समझौता है। इसलिए इसका पूरा श्रेय वर्तमान सरकार को देना उचित नहीं है।


जयराम रमेश ने भाजपा के दावों को बताया भ्रामक

कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने भाजपा के दावों को तथ्यहीन बताते हुए कहा कि पार्टी का पूरा तंत्र इस समझौते को केवल वर्तमान सरकार की उपलब्धि के रूप में प्रस्तुत करने में लगा हुआ है। उन्होंने कहा कि इतिहास और पुराने निर्णयों की अनदेखी करके जनता को भ्रमित नहीं किया जा सकता। उन्होंने यह भी कहा कि किसी भी विषय पर दावा करने से पहले सही तथ्यों की जानकारी होना आवश्यक है।


'पहले अपना अध्ययन पूरा करें'

जयराम रमेश ने भाजपा नेताओं और समर्थकों पर निशाना साधते हुए कहा कि उन्हें किसी भी विषय पर टिप्पणी करने से पहले पूरा अध्ययन कर लेना चाहिए। उन्होंने अपने पक्ष को मजबूत करने के लिए वर्ष 2011 की समाचार रिपोर्ट का उल्लेख भी किया। उनका कहना है कि उसी समय ऑस्ट्रेलिया की लेबर पार्टी ने भारत को यूरेनियम बेचने का रास्ता साफ करने का समर्थन किया था। इससे स्पष्ट होता है कि इस प्रक्रिया की शुरुआत पहले ही हो चुकी थी।


भाजपा ने क्या किया दावा

भारतीय जनता पार्टी के सूचना प्रकोष्ठ के प्रमुख अमित मालवीय ने कहा कि वर्ष 2010 में ऑस्ट्रेलिया ने भारत को यूरेनियम बेचने से इनकार कर दिया था। उनके अनुसार उस समय भारत के परमाणु अप्रसार संधि पर हस्ताक्षर नहीं करने को कारण बताया गया था। उन्होंने दावा किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में दोनों देशों के बीच संबंध मजबूत हुए और अब यूरेनियम निर्यात समझौता संभव हो पाया है। भाजपा इसे वर्तमान सरकार की महत्वपूर्ण विदेश नीति उपलब्धि के रूप में प्रस्तुत कर रही है।


यूरेनियम समझौते का भारत के लिए महत्व

भारत की ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा करने में परमाणु ऊर्जा की भूमिका लगातार बढ़ रही है। ऐसे में यूरेनियम की नियमित आपूर्ति देश के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है। ऑस्ट्रेलिया विश्व के प्रमुख यूरेनियम उत्पादक देशों में शामिल है और उसके साथ सहयोग बढ़ने से भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूती मिलने की संभावना है। यही कारण है कि यह समझौता केवल राजनीतिक नहीं बल्कि रणनीतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।