कर्नाटक में कांग्रेस ने पलटा सियासी खेल

कर्नाटक विधान परिषद चुनाव में कांग्रेस ने सात में से पांच सीटों पर जीत दर्ज कर बड़ा राजनीतिक संदेश दिया है। भारतीय जनता पार्टी और जनता दल सेक्युलर के कई विधायकों द्वारा कथित रूप से पक्ष बदलकर मतदान किए जाने से चुनावी गणित पूरी तरह बदल गया और सत्तारूढ़ दल को अपेक्षा से अधिक समर्थन मिला।

कर्नाटक में कांग्रेस ने पलटा सियासी खेल

दि राइजिंग न्यूज़ | बेंगलुरु | 20 जून 2026

विधान परिषद चुनाव में बदला राजनीतिक समीकरण

कर्नाटक विधान परिषद चुनाव के नतीजों ने राज्य की राजनीति में नई चर्चा छेड़ दी है। सत्तारूढ़ कांग्रेस ने सात में से पांच सीटों पर जीत दर्ज कर विपक्षी गठबंधन को बड़ा झटका दिया है। चुनाव परिणामों से संकेत मिला है कि विपक्षी दलों के कई विधायकों ने अपेक्षित रुख से अलग मतदान किया, जिससे पूरा राजनीतिक समीकरण बदल गया।राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह परिणाम कांग्रेस की रणनीतिक सफलता और विपक्ष की संगठनात्मक चुनौतियों को उजागर करता है।

अपेक्षा से अधिक मिला समर्थन

चुनाव में कांग्रेस को कुल 151 मत प्राप्त हुए, जो उसके अनुमानित समर्थन से अधिक बताए जा रहे हैं। यही अतिरिक्त मत उसकी पांचवीं सीट सुनिश्चित करने में निर्णायक साबित हुए।विधान परिषद की सात सीटों के लिए आठ उम्मीदवार मैदान में थे। कांग्रेस ने पांच उम्मीदवार उतारे थे, जबकि भारतीय जनता पार्टी ने दो और जनता दल सेक्युलर ने एक उम्मीदवार को मैदान में उतारा था।

विपक्षी खेमे में बढ़ी बेचैनी

परिणाम आने के बाद विपक्षी दलों में आत्ममंथन का दौर शुरू हो गया है। चुनावी आंकड़ों से संकेत मिला कि भारतीय जनता पार्टी और जनता दल सेक्युलर के कुछ विधायकों ने अपेक्षित उम्मीदवारों के बजाय कांग्रेस समर्थित उम्मीदवारों के पक्ष में मतदान किया।इसी कारण जनता दल सेक्युलर के उम्मीदवार को अपेक्षित समर्थन नहीं मिल सका और उन्हें पराजय का सामना करना पड़ा।

कांग्रेस की रणनीति रही सफल

राज्य के उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार को इस जीत का प्रमुख रणनीतिकार माना जा रहा है। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि उन्होंने संगठनात्मक स्तर पर प्रभावी समन्वय स्थापित किया और चुनावी प्रबंधन को मजबूती दी।कांग्रेस नेताओं ने इस परिणाम को सरकार की नीतियों और जनकल्याणकारी कार्यक्रमों पर विधायकों के भरोसे का प्रतीक बताया है।

पांच उम्मीदवार बने विधान परिषद सदस्य

कांग्रेस के पांचों उम्मीदवार चुनाव जीतने में सफल रहे। वहीं भारतीय जनता पार्टी के दोनों उम्मीदवारों ने भी जीत दर्ज की।दूसरी ओर जनता दल सेक्युलर के उम्मीदवार को पर्याप्त समर्थन नहीं मिल पाया, जिसके चलते उन्हें हार का सामना करना पड़ा।

पक्ष बदलकर मतदान बना चर्चा का विषय

चुनाव के बाद सबसे अधिक चर्चा पक्ष बदलकर किए गए मतदान को लेकर हो रही है। विभिन्न राजनीतिक सूत्रों का दावा है कि विपक्षी गठबंधन के कई विधायकों ने गुप्त मतदान का लाभ उठाते हुए अलग रुख अपनाया।हालांकि मतदान गोपनीय होने के कारण किसी भी दावे की आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी है।

विधानसभा का गणित और चुनावी परिणाम

कर्नाटक विधानसभा में वर्तमान सदस्य संख्या 222 है। कांग्रेस के पास स्पष्ट बहुमत है और उसे कुछ निर्दलीय तथा अन्य सदस्यों का भी समर्थन प्राप्त है।इसके बावजूद चुनाव परिणामों में मिले अतिरिक्त मतों ने यह संकेत दिया कि विपक्षी खेमे में एकजुटता अपेक्षा के अनुरूप नहीं रही।

विधान परिषद में बदलेगा शक्ति संतुलन

इन परिणामों के बाद विधान परिषद में कांग्रेस की संख्या बढ़ जाएगी, जबकि भारतीय जनता पार्टी और जनता दल सेक्युलर की संख्या में कमी दर्ज होगी।राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि इससे भविष्य में सदन के भीतर सरकार की स्थिति और अधिक मजबूत हो सकती है।

विपक्ष ने संकेत दिए कार्रवाई के

भारतीय जनता पार्टी के नेताओं ने चुनाव परिणामों के बाद कहा है कि यदि किसी विधायक द्वारा पार्टी लाइन से हटकर मतदान किया गया है तो उसकी पहचान की जाएगी और आवश्यक कार्रवाई पर विचार किया जाएगा।वहीं जनता दल सेक्युलर के भीतर भी इस परिणाम को लेकर समीक्षा की तैयारी शुरू हो गई है।

आने वाले दिनों में बढ़ सकती है सियासी हलचल

कर्नाटक विधान परिषद चुनाव के नतीजों ने राज्य की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। कांग्रेस इस जीत को अपने बढ़ते प्रभाव का प्रमाण बता रही है, जबकि विपक्ष इसे संगठनात्मक चुनौती के रूप में देख रहा है।आने वाले दिनों में पक्ष बदलकर मतदान के आरोपों और संभावित अनुशासनात्मक कार्रवाइयों को लेकर राज्य की राजनीति में हलचल और तेज होने की संभावना है।