बिहार में उच्च शिक्षा को नई रफ्तार

बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने राज्य के महाविद्यालयों में शाम आठ बजे तक कक्षाएं संचालित करने का सुझाव दिया है। उनका मानना है कि उच्च शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए शिक्षण समय बढ़ाना आवश्यक है। सरकार दो सौ से अधिक नए महाविद्यालय खोलने और नई विश्वविद्यालय परियोजनाओं पर भी काम कर रही है।

बिहार में उच्च शिक्षा को नई रफ्तार

दि राइजिंग न्यूज़ | पटना | 20 जून 2026

बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने राज्य की उच्च शिक्षा व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने के लिए महाविद्यालयों में शाम आठ बजे तक कक्षाएं संचालित करने का सुझाव दिया है। उनका कहना है कि वर्तमान व्यवस्था में दोपहर के बाद अधिकांश शिक्षण संस्थानों का परिसर खाली हो जाता है, जबकि उपलब्ध संसाधनों का अधिकतम उपयोग कर छात्रों को बेहतर शैक्षणिक अवसर प्रदान किए जा सकते हैं।

शाम तक कक्षाएं चलाने का सुझाव

पटना स्थित एएन महाविद्यालय के स्थापना दिवस कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्होंने महाविद्यालय प्रशासन से शिक्षण समय के बारे में जानकारी ली थी। उन्हें बताया गया कि दोपहर के बाद परिसर लगभग खाली हो जाता है। मुख्यमंत्री ने इसे एक अवसर बताते हुए कहा कि यदि शाम तक कक्षाएं संचालित की जाएं तो अधिक विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराई जा सकती है।उन्होंने स्पष्ट किया कि यह केवल एक सुझाव नहीं है, बल्कि सरकार इस दिशा में व्यवहारिक व्यवस्था तैयार करने पर गंभीरता से विचार कर रही है।

दूसरे राज्यों की ओर पलायन पर चिंता

मुख्यमंत्री ने कहा कि बड़ी संख्या में छात्र उच्च शिक्षा के लिए पंजाब, महाराष्ट्र और अन्य राज्यों का रुख करते हैं। उन्होंने इसे चिंता का विषय बताते हुए कहा कि बिहार की शिक्षा व्यवस्था को इतना मजबूत बनाया जाना चाहिए कि विद्यार्थियों को पढ़ाई के लिए राज्य से बाहर जाने की आवश्यकता न पड़े।उन्होंने कहा कि राज्य के युवाओं को बेहतर शिक्षण सुविधाएं, आधुनिक पाठ्यक्रम और पर्याप्त शैक्षणिक संस्थान उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकता है।

दो सौ से अधिक नए महाविद्यालय खुलेंगे

मुख्यमंत्री ने जानकारी दी कि बिहार सरकार राज्य में दो सौ से अधिक नए महाविद्यालय स्थापित करने की योजना पर कार्य कर रही है। इसके साथ ही मुक्त विश्वविद्यालय और मान्यता प्राप्त विशेष विश्वविद्यालयों की स्थापना को लेकर भी योजनाएं तैयार की जा रही हैं।सरकार का मानना है कि बढ़ती आबादी और उच्च शिक्षा की मांग को देखते हुए नए संस्थानों की स्थापना आवश्यक है। इससे छात्रों को अपने ही क्षेत्र में बेहतर शिक्षा प्राप्त करने का अवसर मिलेगा।

भूमि की कमी नहीं बनेगी बाधा

सम्राट चौधरी ने कहा कि राज्य की बड़ी आबादी को देखते हुए शिक्षा का विस्तार समय की मांग है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि भूमि संबंधी चुनौतियों को विश्वविद्यालयों की स्थापना में बाधा नहीं बनने दिया जाए।उन्होंने कहा कि नए शैक्षणिक संस्थानों से जुड़े प्रस्तावों को शीघ्र मंत्रिमंडल के समक्ष प्रस्तुत किया जाए ताकि आवश्यक स्वीकृतियां जल्द प्राप्त हो सकें और योजनाओं पर तेजी से काम शुरू किया जा सके।

शिक्षा क्षेत्र में बढ़ रहा निवेश

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में शिक्षा के क्षेत्र में व्यापक स्तर पर कार्य किए जा रहे हैं। उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा शुरू की गई योजनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि सरकार उन प्रयासों को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है।उन्होंने बताया कि एक समय बिहार का वार्षिक बजट लगभग छह हजार करोड़ रुपये था, जबकि आज यह बढ़कर तीन लाख सत्रह हजार करोड़ रुपये से अधिक हो चुका है। यह परिवर्तन राज्य की आर्थिक क्षमता और विकास की दिशा में बढ़ते कदमों को दर्शाता है।

शिक्षा को विकास का आधार मान रही सरकार

मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार के समग्र विकास के लिए शिक्षा सबसे महत्वपूर्ण आधार है। सरकार का लक्ष्य केवल नए संस्थान खोलना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों को बेहतर शिक्षण वातावरण, आधुनिक सुविधाएं और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना भी है।राज्य सरकार को उम्मीद है कि प्रस्तावित सुधारों और नए शैक्षणिक संस्थानों की स्थापना से बिहार की उच्च शिक्षा व्यवस्था अधिक मजबूत होगी तथा छात्रों को अपने भविष्य निर्माण के लिए राज्य के भीतर ही बेहतर अवसर प्राप्त होंगे।