पीरियड टैक्स खत्म होने से उम्मीदें बढ़ीं

पाकिस्तान सरकार ने सैनिटरी पैड और अन्य मासिक धर्म उत्पादों पर लगने वाला पीरियड टैक्स हटाने का kl ऐलान किया है। इस फैसले से करोड़ों महिलाओं को राहत मिलने की उम्मीद है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे उत्पाद सस्ते होंगे, लेकिन स्थायी बदलाव के लिए स्वच्छता सुविधाओं और जागरूकता पर भी काम करना होगा।

पीरियड टैक्स खत्म होने से उम्मीदें बढ़ीं

दि राइजिंग न्यूज़ | इस्लामाबाद | 19 जून 2026

पीरियड टैक्स खत्म होने से उम्मीदें बढ़ीं

पाकिस्तान सरकार ने महिलाओं के स्वास्थ्य और मासिक धर्म स्वच्छता से जुड़े एक महत्वपूर्ण फैसले की घोषणा करते हुए सैनिटरी पैड और अन्य मेंस्ट्रुअल हेल्थ उत्पादों पर लगने वाला पीरियड टैक्स समाप्त करने का निर्णय लिया है। सरकार का मानना है कि ये उत्पाद किसी विलासिता की वस्तु नहीं बल्कि महिलाओं की बुनियादी आवश्यकता हैं, इसलिए इन पर कर लगाना उचित नहीं है।वित्त मंत्री मुहम्मद औरंगजेब ने इस फैसले की जानकारी देते हुए कहा कि महिलाओं के स्वास्थ्य, सम्मान और सामाजिक भागीदारी को ध्यान में रखते हुए यह कदम उठाया गया है। सरकार का उद्देश्य महिलाओं के लिए आवश्यक स्वास्थ्य उत्पादों को अधिक सुलभ और किफायती बनाना है।

क्या होता है पीरियड टैक्स

पीरियड टैक्स वह कर होता है जो सैनिटरी पैड, टैम्पोन और अन्य मासिक धर्म संबंधी उत्पादों पर लगाया जाता है। पाकिस्तान में स्थानीय स्तर पर बनने वाले सैनिटरी उत्पादों पर 18 प्रतिशत सेल्स टैक्स लगाया जाता था, जबकि आयातित उत्पादों पर अतिरिक्त 25 प्रतिशत तक कस्टम ड्यूटी भी देनी पड़ती थी।इन करों के कारण बाजार में सैनिटरी उत्पादों की कीमतें काफी बढ़ जाती थीं, जिससे बड़ी संख्या में महिलाओं के लिए इन्हें खरीदना मुश्किल हो जाता था। इसी वजह से लंबे समय से महिला अधिकार संगठनों द्वारा इस टैक्स को समाप्त करने की मांग की जा रही थी।

केवल 12 प्रतिशत महिलाएं करती हैं पैड का उपयोग

यूनिसेफ के आंकड़ों के अनुसार पाकिस्तान में केवल 12 प्रतिशत महिलाएं ही बाजार में उपलब्ध सैनिटरी पैड का इस्तेमाल कर पाती हैं। अधिकांश महिलाएं पुराने कपड़ों या घरेलू विकल्पों का सहारा लेने को मजबूर हैं। अस्वच्छ कपड़ों का बार-बार उपयोग संक्रमण, त्वचा रोग और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकता है। ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग की महिलाओं पर इसका सबसे अधिक प्रभाव पड़ता है।

शिक्षा और रोजगार पर भी पड़ता है असर

मासिक धर्म स्वच्छता की कमी का असर केवल स्वास्थ्य तक सीमित नहीं रहता। कई किशोरियां पीरियड्स के दौरान स्कूल नहीं जा पातीं, जिससे उनकी पढ़ाई प्रभावित होती है। कार्यस्थलों पर भी महिलाओं को कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है।संयुक्त राष्ट्र महिला संगठन ने इस फैसले का स्वागत करते हुए कहा है कि इससे लड़कियों की शिक्षा और महिलाओं की आर्थिक भागीदारी को बढ़ावा मिलेगा।

सामाजिक बदलाव की भी जरूरत

विशेषज्ञों का मानना है कि केवल टैक्स हटाने से समस्या पूरी तरह समाप्त नहीं होगी। महिलाओं को स्वच्छ पानी, बेहतर शौचालय सुविधाएं, स्वास्थ्य संबंधी जानकारी और सामाजिक जागरूकता भी उपलब्ध करानी होगी।महवारी से जुड़े सामाजिक कलंक और झिझक को समाप्त किए बिना व्यापक बदलाव संभव नहीं है। इसलिए सरकार और सामाजिक संगठनों को इस दिशा में भी लगातार काम करना होगा।

कानूनी लड़ाई के बाद मिला परिणाम

इस फैसले के पीछे युवा वकील महनूर ओमर की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। उन्होंने सरकार के खिलाफ अदालत में याचिका दायर कर यह सवाल उठाया था कि महिलाओं की आवश्यक जरूरतों को विलासिता की वस्तु मानकर कर क्यों लगाया जा रहा है।उनकी मुहिम को सोशल मीडिया और महिला संगठनों का व्यापक समर्थन मिला। इसके बाद यह मुद्दा राष्ट्रीय बहस का विषय बना और अंततः सरकार को अपना रुख बदलना पड़ा।

महिलाओं के लिए बड़ी राहत

पाकिस्तान में पीरियड टैक्स हटाने का फैसला महिलाओं के स्वास्थ्य और सम्मान की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इससे सैनिटरी उत्पादों की कीमतों में कमी आने की संभावना है और लाखों महिलाओं के लिए इन्हें खरीदना आसान हो सकता है।वास्तविक परिवर्तन तभी संभव होगा जब सस्ते उत्पादों के साथ-साथ बेहतर स्वच्छता सुविधाएं, जागरूकता अभियान और सामाजिक सोच में बदलाव भी देखने को मिलेगा। फिलहाल यह निर्णय महिलाओं के जीवन को बेहतर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखा जा रहा है।