रिटायर बुजुर्ग बने शहर के निगरानीकर्ता: इटली
इटली के विलासांता शहर में रिटायर बुजुर्गों को सार्वजनिक निर्माण कार्यों की निगरानी की जिम्मेदारी दी गई है। पहले जो लोग निर्माण स्थलों के पास खड़े होकर काम देखते थे, अब वही सड़क, फुटपाथ, स्ट्रीट लाइट और अन्य परियोजनाओं की स्थिति पर नजर रखकर प्रशासन को रिपोर्ट दे रहे हैं।
दि राइजिंग न्यूज़ | विलासांता | 20 जून 2026
रिटायरमेंट के बाद मिला नई जिम्मेदारी का अवसर
आमतौर पर रिटायरमेंट के बाद लोग आरामदायक जीवन बिताना पसंद करते हैं, लेकिन इटली के एक छोटे से शहर में बुजुर्गों को समाज के लिए उपयोगी भूमिका देने की अनोखी पहल की गई है। यहां वे बुजुर्ग, जो वर्षों से निर्माण स्थलों के पास खड़े होकर कामकाज को देखा करते थे, अब आधिकारिक रूप से सार्वजनिक निर्माण कार्यों की निगरानी कर रहे हैं।इटली के लोम्बार्डी क्षेत्र में स्थित विलासांता शहर की यह पहल इन दिनों पूरे देश में चर्चा का विषय बनी हुई है। स्थानीय प्रशासन का मानना है कि वरिष्ठ नागरिकों का अनुभव और उनकी बारीक नजर शहर के विकास कार्यों को बेहतर बनाने में मदद कर सकती है।
कौन हैं ‘उमरेल’
इटली में ऐसे बुजुर्गों के लिए एक खास शब्द प्रचलित है— उमरेल। यह शब्द उन रिटायर्ड लोगों के लिए इस्तेमाल किया जाता है जो सुबह घर से निकलकर किसी सड़क, पुल या निर्माणाधीन इमारत के पास पहुंच जाते हैं और घंटों तक काम को ध्यान से देखते रहते हैं।इनकी एक अलग पहचान भी होती है। सिर पर टोपी, हल्की जैकेट और पीठ के पीछे बंधे हुए हाथ। वे निर्माण कार्यों का निरीक्षण करते हुए अक्सर अपनी राय भी देते हैं और कई बार मजदूरों तथा इंजीनियरों को सुझाव देने लगते हैं।
एक स्थानीय शब्द से राष्ट्रीय पहचान तक
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार ‘उमरेल’ शब्द का उपयोग सबसे पहले वर्ष 2005 में लेखक डेनिलो मासोटी ने किया था। यह शब्द बोलोन्या क्षेत्र की स्थानीय बोली के शब्द ‘उमारेल’ से निकला है, जिसका अर्थ होता है ‘छोटा आदमी’।समय के साथ यह शब्द पूरे इटली में लोकप्रिय हो गया। वर्ष 2016 में इसका उपयोग एक प्रमुख फास्ट फूड कंपनी के विज्ञापन में भी किया गया। बाद में 2021 में इसे आधिकारिक रूप से इटैलियन शब्दकोश में भी शामिल कर लिया गया।
प्रशासन ने बदली सोच
विलासांता नगर प्रशासन ने महसूस किया कि जब ये बुजुर्ग पहले से ही शहर के निर्माण कार्यों पर इतनी गहरी नजर रखते हैं, तो उनकी इस आदत को सार्वजनिक हित में बदला जा सकता है।इसके बाद कुछ रिटायर्ड नागरिकों को स्वयंसेवक के रूप में जिम्मेदारी सौंपी गई। इनमें 69 वर्षीय रोबर्टो क्रेमोना और गैब्रिएला गराट्टी जैसे वरिष्ठ नागरिक शामिल हैं।इनका काम निर्माण कार्यों में हस्तक्षेप करना नहीं, बल्कि शहर में चल रही परियोजनाओं और सार्वजनिक सुविधाओं की स्थिति पर नजर रखना है।
क्या है इनकी जिम्मेदारी
इन स्वयंसेवकों को शहर के अलग-अलग हिस्सों की जिम्मेदारी दी गई है। वे प्रतिदिन दो से तीन घंटे तक अपने क्षेत्र का निरीक्षण करते हैं।निरीक्षण के दौरान वे सड़कों के गड्ढे, खराब स्ट्रीट लाइट, टूटी हुई फुटपाथ, घास की कटाई, सड़क निर्माण और अन्य सार्वजनिक सुविधाओं की स्थिति का आकलन करते हैं।यदि उन्हें कहीं कोई समस्या दिखाई देती है तो उसकी जानकारी तुरंत नगर प्रशासन को दी जाती है ताकि समय रहते कार्रवाई की जा सके।
शुरुआती निरीक्षण में मिली कई खामियां
स्वयंसेवक गैब्रिएला गराट्टी ने बताया कि निरीक्षण के शुरुआती दौर में ही कई समस्याएं सामने आईं।उन्होंने कुछ ऐसे स्थानों की पहचान की जहां फाइबर ऑप्टिक केबल बिछाने के बाद सड़क को ठीक तरीके से बहाल नहीं किया गया था। इसके अलावा एक चौराहे पर आवश्यक संकेतक नहीं लगे थे, जिससे दुर्घटना की आशंका बनी हुई थी।इन रिपोर्टों के आधार पर प्रशासन ने संबंधित विभागों को सुधारात्मक कार्रवाई के निर्देश दिए।
सलाह देने की नहीं है अनुमति
हालांकि नगर प्रशासन ने इन स्वयंसेवकों के लिए कुछ स्पष्ट नियम भी बनाए हैं।उन्हें निर्माण स्थलों पर जाकर मजदूरों या इंजीनियरों को सलाह देने अथवा काम में दखल देने की अनुमति नहीं है। उनका काम केवल समस्याओं की पहचान करना और प्रशासन को जानकारी देना है।शहर के मेयर लोरेंजो गैली का कहना है कि पारंपरिक उमरेल केवल टिप्पणी करते हैं, जबकि स्वयंसेवक के रूप में काम कर रहे बुजुर्ग समाधान का हिस्सा बनते हैं।
कर्मचारियों को भी मिल रही मदद
नगर निगम के लिए काम करने वाले कर्मचारियों का कहना है कि इन स्वयंसेवकों की मौजूदगी से उन्हें कोई परेशानी नहीं होती।घास काटने का कार्य करने वाले कर्मचारी फैब्रिजियो के अनुसार यह व्यवस्था काम की गुणवत्ता सुधारने में मदद कर रही है। उनका कहना है कि वास्तविक समस्या उन लोगों से होती है जो बिना कारण बहस करते हैं, जबकि ये स्वयंसेवक केवल उपयोगी सुझाव और जानकारी देते हैं।
बुजुर्गों को मिला नया उद्देश्य
इस पहल का सबसे सकारात्मक पहलू यह है कि इससे बुजुर्गों को जीवन का नया उद्देश्य मिला है।रिटायरमेंट के बाद अक्सर लोग खुद को समाज से अलग-थलग महसूस करने लगते हैं, लेकिन इस जिम्मेदारी ने उन्हें फिर से सक्रिय बना दिया है। वे शहर के विकास में योगदान देकर खुद को उपयोगी और सम्मानित महसूस कर रहे हैं।रोबर्टो क्रेमोना और उनके साथी अब पार्किंग व्यवस्था सुधारने जैसे नए प्रोजेक्ट्स पर भी विचार कर रहे हैं।
पारिवारिक जिम्मेदारियों के बीच निभा रहे भूमिका
हालांकि इन स्वयंसेवकों के सामने कुछ चुनौतियां भी हैं। किसी को डॉक्टर के पास जाना होता है तो किसी को अपने पोते-पोतियों की देखभाल करनी पड़ती है।इसके बावजूद वे आपस में तालमेल बनाकर यह सुनिश्चित करते हैं कि निगरानी का काम प्रभावित न हो। यही सामूहिक भावना इस पहल को और अधिक सफल बना रही है।
दुनिया के लिए एक प्रेरक मॉडल
विलासांता का यह मॉडल अन्य देशों और शहरों के लिए भी प्रेरणा बन सकता है।जिस आदत को कभी केवल समय बिताने का तरीका माना जाता था, वही आज सार्वजनिक व्यवस्था को बेहतर बनाने का माध्यम बन गई है। इस पहल ने यह साबित किया है कि अनुभव और समाज के प्रति जिम्मेदारी की भावना उम्र की मोहताज नहीं होती।इटली के इन बुजुर्गों की कहानी यह संदेश देती है कि रिटायरमेंट जीवन का अंत नहीं, बल्कि समाज को नए तरीके से योगदान देने की एक नई शुरुआत भी हो सकती है।