पुनर्परीक्षा के दौरान संदेश मंच पर रोक बरकरार

दिल्ली उच्च न्यायालय ने चिकित्सा प्रवेश पुनर्परीक्षा के मद्देनजर संदेश साझा करने वाले मंच पर लगाए गए पांच दिनों के अस्थायी प्रतिबंध को सही ठहराया है। न्यायालय ने कहा कि केंद्र सरकार ने सभी आवश्यक प्रक्रियाओं का पालन करते हुए यह निर्णय लिया और परीक्षा की निष्पक्षता बनाए रखने के लिए यह कदम उचित है।

पुनर्परीक्षा के दौरान संदेश मंच पर रोक बरकरार

दि राइजिंग न्यूज़ | नई दिल्ली | 20 जून 2026

न्यायालय ने बरकरार रखा प्रतिबंध

दिल्ली उच्च न्यायालय ने चिकित्सा प्रवेश पुनर्परीक्षा के दौरान संदेश साझा करने वाले लोकप्रिय मंच पर लगाए गए पांच दिनों के अस्थायी प्रतिबंध को बरकरार रखा है। न्यायालय ने केंद्र सरकार के फैसले को सही ठहराते हुए कहा कि इस मामले में सभी निर्धारित प्रक्रियाओं का पालन किया गया है और आदेश जारी करने के लिए पर्याप्त कारण मौजूद थे।यह प्रतिबंध परीक्षा के आयोजन को ध्यान में रखते हुए लगाया गया था। पुनर्परीक्षा 21 जून को आयोजित होनी है और अस्थायी प्रतिबंध 22 जून तक प्रभावी रहेगा।

सरकार के अधिकार को मिली मान्यता

न्यायालय ने अपने फैसले में कहा कि केंद्र सरकार के पास आवश्यक परिस्थितियों में डिजिटल मंचों पर प्रतिबंध लगाने का अधिकार है। अदालत ने माना कि उपलब्ध तथ्यों और सामग्री पर विचार करने के बाद ही यह निर्णय लिया गया था।न्यायालय ने कहा कि आदेश जारी करने में किसी प्रकार की प्रक्रिया संबंधी त्रुटि नहीं पाई गई और आपात स्थिति को देखते हुए उठाया गया कदम उचित था।

सूचना नहीं मिलने का तर्क खारिज

सुनवाई के दौरान यह दलील दी गई कि आदेश की जानकारी समय पर नहीं दी गई थी। हालांकि न्यायालय ने इस तर्क को स्वीकार नहीं किया। अदालत ने कहा कि मामले की प्रकृति और परिस्थितियों को देखते हुए सरकार द्वारा अपनाई गई प्रक्रिया पर्याप्त थी।न्यायालय ने यह भी कहा कि आदेश में विचार-विमर्श की कोई कमी नहीं थी और सभी पहलुओं पर गंभीरता से विचार किया गया था।

प्रश्नपत्र लीक की आशंका बनी वजह

केंद्र सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि पूर्व में कई बार इस मंच का नाम प्रश्नपत्र लीक और फर्जी प्रश्नपत्रों के प्रसार से जुड़े मामलों में सामने आया है। इसके अलावा विभिन्न प्रकार की साइबर ठगी और अवैध गतिविधियों में भी इसके उपयोग की शिकायतें मिलती रही हैं।सरकार का कहना था कि परीक्षा की पवित्रता बनाए रखने और किसी भी प्रकार की गड़बड़ी रोकने के लिए यह प्रतिबंध आवश्यक था।

उच्चस्तरीय समिति ने की समीक्षा

सुनवाई के दौरान सरकार ने बताया कि मामले की समीक्षा एक उच्चस्तरीय समिति द्वारा की गई थी। समिति की अध्यक्षता मंत्रिमंडल सचिव स्तर के अधिकारी द्वारा की गई और सभी उपलब्ध तथ्यों का अध्ययन करने के बाद निर्णय लिया गया।सरकार ने यह भी बताया कि संबंधित मंच के प्रतिनिधियों को अपनी बात रखने का अवसर दिया गया था और उनकी दलीलों को रिकॉर्ड में शामिल किया गया।

विशेष सुविधाएं बनीं चिंता का कारण

 इस मंच पर बड़ी संख्या में लोगों को एक समूह में जोड़ा जा सकता है। इसके अलावा बड़े आकार की सामग्री को सुरक्षित रखने और साझा करने की सुविधा भी उपलब्ध है।बिना दूरभाष संख्या सार्वजनिक किए खाता बनाने जैसी सुविधाएं भी इसे अन्य मंचों से अलग बनाती हैं। यही कारण है कि परीक्षा से जुड़ी संवेदनशील जानकारी के दुरुपयोग की आशंका अधिक मानी जाती है।

परीक्षा सुरक्षा को प्राथमिकता

न्यायालय ने अपने फैसले में संकेत दिया कि राष्ट्रीय महत्व की परीक्षाओं की निष्पक्षता और पारदर्शिता सर्वोपरि है। यदि परीक्षा प्रक्रिया प्रभावित होने की संभावना हो तो सरकार आवश्यक कदम उठा सकती है।अदालत ने माना कि इस मामले में सरकार द्वारा उठाया गया कदम परीक्षा सुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से लिया गया था।

22 जून तक प्रभावी रहेगा आदेश

न्यायालय के निर्णय के बाद अस्थायी प्रतिबंध निर्धारित अवधि तक लागू रहेगा। प्रशासन का मानना है कि इससे परीक्षा प्रक्रिया को निष्पक्ष और व्यवस्थित बनाए रखने में सहायता मिलेगी।अब सभी की निगाहें पुनर्परीक्षा के शांतिपूर्ण और सफल आयोजन पर टिकी हैं, जिसके बाद प्रतिबंध की अवधि भी समाप्त हो जाएगी।