फुटपाथ बना लेकिन रास्ता गायब

मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में एक बार फिर निर्माण कार्य को लेकर सवाल उठ रहे हैं। पीएंडटी चौराहे पर बनाए गए फुटपाथ तक पहुंचने के लिए पर्याप्त रास्ता नहीं छोड़े जाने का आरोप है। स्थानीय लोगों का कहना है कि सुरक्षा के नाम पर लगाई गई रेलिंग ने पैदल यात्रियों की परेशानी बढ़ा दी है।

फुटपाथ बना लेकिन रास्ता गायब

दि राइजिंग न्यूज़ | भोपाल | 20 जून 2026

फुटपाथ निर्माण पर उठे सवाल

मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में एक बार फिर सार्वजनिक निर्माण कार्य चर्चा का विषय बन गया है। शहर के वार्ड-32 स्थित पीएंडटी चौराहे पर पैदल यात्रियों की सुविधा के लिए बनाए गए फुटपाथ को लेकर स्थानीय लोगों ने गंभीर आपत्तियां जताई हैं। उनका कहना है कि फुटपाथ तो तैयार कर दिया गया, लेकिन उस तक पहुंचने के लिए पर्याप्त रास्ता नहीं छोड़ा गया।इस कारण जिस सुविधा का उद्देश्य लोगों को सुरक्षित आवागमन उपलब्ध कराना था, वही अब परेशानी का कारण बनती दिखाई दे रही है।

रेलिंग ने बढ़ाई मुश्किलें

स्थानीय निवासियों के अनुसार फुटपाथ के किनारे लगभग तीन फीट ऊंची लोहे की रेलिंग लगाई गई है। कई स्थानों पर पहले से मौजूद दीवारों के साथ यह रेलिंग मिलकर फुटपाथ को पूरी तरह घेरती हुई नजर आती है।लोगों का कहना है कि कई हिस्सों में फुटपाथ पर चढ़ने या प्रवेश करने के लिए पर्याप्त जगह नहीं छोड़ी गई है। परिणामस्वरूप पैदल यात्रियों को फुटपाथ का उपयोग करने के बजाय सड़क पर चलना पड़ रहा है।

यात्रियों को हो रही परेशानी

रोजाना सार्वजनिक परिवहन का उपयोग करने वाले यात्रियों को भी इस व्यवस्था से कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। स्थानीय लोगों के मुताबिक बस या अन्य वाहनों से उतरने के बाद फुटपाथ तक पहुंचने का सीधा मार्ग उपलब्ध नहीं है।ऐसी स्थिति में यात्रियों को मुख्य सड़क पर चलना पड़ता है, जिससे दुर्घटनाओं की आशंका बढ़ जाती है। लोगों का कहना है कि पैदल यात्रियों की सुरक्षा के लिए बनाई गई व्यवस्था उल्टा जोखिम पैदा कर रही है।

लोगों ने उठाए सवाल

स्थानीय रहवासियों ने सवाल उठाया है कि यदि फुटपाथ का उद्देश्य सुरक्षित पैदल मार्ग उपलब्ध कराना है तो उसके उपयोग में बाधाएं क्यों खड़ी की गईं। उनका मानना है कि योजना तैयार करते समय आम लोगों की जरूरतों और जमीनी परिस्थितियों का पर्याप्त आकलन नहीं किया गया।कई लोगों ने इस निर्माण को लेकर सोशल मीडिया और स्थानीय स्तर पर भी नाराजगी व्यक्त की है।

फुटपाथ या पिंजरा

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि सुरक्षा और सौंदर्यीकरण के नाम पर ऐसा डिजाइन तैयार किया गया है, जो व्यावहारिक जरूरतों से मेल नहीं खाता। कुछ लोगों ने इसे फुटपाथ के बजाय "पिंजरा" तक करार दिया है।उनका कहना है कि जब आम नागरिक आसानी से फुटपाथ पर पहुंच ही नहीं सकते, तो उसके निर्माण का उद्देश्य अधूरा रह जाता है।

सरकारी धन के उपयोग पर सवाल

निवासियों ने इस परियोजना पर खर्च हुए सरकारी धन को लेकर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि यदि निर्माण कार्य लोगों के उपयोग में नहीं आ रहा है तो योजना की प्रभावशीलता पर पुनर्विचार किया जाना चाहिए।लोगों का मानना है कि किसी भी सार्वजनिक परियोजना का मूल्यांकन उसकी उपयोगिता के आधार पर होना चाहिए।

प्रशासन से बदलाव की मांग

स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि रेलिंग के बीच पर्याप्त प्रवेश द्वार या खुली जगह बनाई जाए ताकि पैदल यात्री आसानी से फुटपाथ का उपयोग कर सकें।उन्होंने कहा कि डिजाइन में आवश्यक संशोधन कर पैदल यात्रियों की सुविधा को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। इससे न केवल लोगों की आवाजाही आसान होगी बल्कि सड़क सुरक्षा भी बेहतर होगी।

चर्चा का विषय बना निर्माण

फिलहाल पीएंडटी चौराहे का यह फुटपाथ स्थानीय स्तर पर चर्चा का प्रमुख विषय बना हुआ है। लोग उम्मीद कर रहे हैं कि संबंधित विभाग स्थिति का संज्ञान लेकर आवश्यक सुधार करेगा।शहरी विकास विशेषज्ञों का भी मानना है कि किसी भी बुनियादी ढांचा परियोजना में उपयोगकर्ता की सुविधा को केंद्र में रखना आवश्यक है, तभी ऐसी योजनाएं अपने वास्तविक उद्देश्य को पूरा कर सकती हैं।