भारत-यूके एफटीए से सस्ती होंगी लग्जरी कारें

भारत और यूनाइटेड किंगडम के बीच फ्री ट्रेड एग्रीमेंट 15 जुलाई 2026 से लागू होने जा रहा है। इस समझौते के तहत कई आयातित ब्रिटिश कारों पर टैरिफ में बड़ी कटौती होगी, जिससे भारत में लग्जरी और प्रीमियम कारों की कीमतों में उल्लेखनीय कमी आने की संभावना है।

भारत-यूके एफटीए से सस्ती होंगी लग्जरी कारें

दि राइजिंग न्यूज़ | नई दिल्ली | 19 जून 2026

भारत-यूके समझौते से ऑटो सेक्टर को बड़ा फायदा

भारत और यूनाइटेड किंगडम के बीच हुआ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (एफटीए) 15 जुलाई 2026 से प्रभावी होने जा रहा है। इस समझौते का असर कई क्षेत्रों पर पड़ेगा, लेकिन सबसे अधिक चर्चा ऑटोमोबाइल सेक्टर में संभावित बदलावों को लेकर हो रही है। एफटीए लागू होने के बाद ब्रिटेन से आयात की जाने वाली कई प्रीमियम और लग्जरी कारों पर आयात शुल्क में भारी कटौती होगी। इसके चलते भारतीय ग्राहकों को महंगी विदेशी कारें अपेक्षाकृत कम कीमत पर उपलब्ध हो सकती हैं।

टैरिफ में होगी बड़ी कमी

यूनाइटेड किंगडम के व्यापार विभाग के अनुसार समझौते के तहत निर्धारित कोटा प्रणाली में कई ब्रिटिश कारों पर आयात शुल्क को 100 प्रतिशत से घटाकर केवल 10 प्रतिशत तक लाया जाएगा। इस कदम से ब्रिटिश वाहन निर्माताओं के लिए भारतीय बाजार में प्रवेश आसान होगा और प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी। हालांकि अभी तक यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि टैरिफ में छूट के लिए कुल कोटा कितना निर्धारित किया गया है।

लग्जरी कारों की कीमतों पर असर

ऑटोमोबाइल विशेषज्ञों का मानना है कि टैरिफ में कटौती का सीधा लाभ ग्राहकों को मिलेगा। आयात लागत कम होने से कई प्रीमियम कारों की कीमतों में लाखों रुपये तक की कमी आ सकती है। इसका लाभ विशेष रूप से उन ग्राहकों को मिलेगा जो विदेशी लग्जरी कारें खरीदने की योजना बना रहे हैं।

जेएलआर ने शुरू की कीमतों में कटौती

भारत-यूके एफटीए का असर पहले से दिखाई देने लगा है। जगुआर लैंड रोवर (जेएलआर) ने अपने कुछ मॉडलों की कीमतों में कमी की घोषणा कर दी है। कंपनी ने रेंज रोवर एसवी की कीमत में 75 लाख रुपये की कटौती की है। पहले यह मॉडल 4.25 करोड़ रुपये में उपलब्ध था, जबकि अब इसकी कीमत लगभग 3.50 करोड़ रुपये कर दी गई है। इसी प्रकार रेंज रोवर स्पोर्ट एसवी की कीमत में 40 लाख रुपये की कमी की गई है। इसकी कीमत 2.75 करोड़ रुपये से घटकर 2.35 करोड़ रुपये हो गई है।

मैकलारेन भी कर सकती है बड़ी कटौती

ब्रिटिश सुपरकार निर्माता मैकलारेन भी अपनी कारों की कीमतों में बड़ी कमी की तैयारी कर रही है। रिपोर्टों के अनुसार मैकलारेन 750एस कूपे की कीमत में लगभग 3 करोड़ रुपये तक की कटौती हो सकती है। वर्तमान में इस मॉडल की कीमत करीब 7.94 करोड़ रुपये है, जो घटकर लगभग 4.94 करोड़ रुपये तक पहुंच सकती है। वहीं 750एस स्पाइडर मॉडल की कीमत में भी 3 करोड़ रुपये से अधिक की कमी आने की संभावना जताई जा रही है।

विभिन्न श्रेणियों पर अलग-अलग नियम

एफटीए के तहत अलग-अलग इंजन क्षमता वाली कारों पर टैरिफ कटौती की व्यवस्था की गई है। पहले वर्ष में 3000 सीसी से अधिक क्षमता वाले पेट्रोल इंजन और 2500 सीसी से अधिक क्षमता वाले डीजल इंजन वाली कारों पर आयात शुल्क 110 प्रतिशत से घटाकर 30 प्रतिशत किया जाएगा। यह सुविधा 10 हजार वाहनों के निर्धारित कोटा तक लागू होगी। इसके अलावा 1500 सीसी से 3000 सीसी तक के पेट्रोल इंजन तथा 2500 सीसी तक के डीजल इंजन वाली कारों पर शुल्क 66 प्रतिशत से घटाकर 50 प्रतिशत किया जाएगा। इस श्रेणी में 5000 वाहनों का कोटा निर्धारित रहेगा। 1500 सीसी तक के इंजन वाली कारों के लिए भी शुरुआती वर्ष में 50 प्रतिशत शुल्क लागू रहेगा और इसके लिए भी 5000 वाहनों का कोटा रखा गया है।

भारतीय उद्योगों को भी मिलेगा लाभ

यह समझौता केवल ऑटोमोबाइल क्षेत्र तक सीमित नहीं है। भारतीय उद्योगों को भी यूनाइटेड किंगडम के बाजार में बेहतर अवसर मिलने की उम्मीद है। टेक्सटाइल, चमड़ा, फुटवियर, इलेक्ट्रॉनिक्स, फार्मास्यूटिकल्स और अन्य विनिर्माण क्षेत्रों की भारतीय कंपनियों को ब्रिटिश बाजार में अपने उत्पादों के निर्यात का बड़ा अवसर मिलेगा।  यह समझौता दोनों देशों के बीच व्यापार को नई गति देगा।

ग्राहकों के लिए खुलेंगे नए विकल्प

ऑटोमोबाइल बाजार के जानकारों का कहना है कि टैरिफ में कमी के बाद भारतीय ग्राहकों को अधिक विकल्प मिलेंगे और प्रीमियम कार सेगमेंट में प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी। प्रतिस्पर्धा बढ़ने से न केवल कीमतों में कमी आएगी बल्कि ग्राहकों को बेहतर तकनीक, नए मॉडल और उन्नत सुविधाएं भी मिल सकेंगी।

15 जुलाई से लागू होगा समझौता

भारत और यूनाइटेड किंगडम के बीच यह व्यापार समझौता 15 जुलाई 2026 से लागू होगा। दोनों देशों ने व्यवसायों को आवश्यक तैयारियां पूरी करने और पंजीकरण प्रक्रियाएं पूरी करने के लिए समय दिया है। व्यापार विशेषज्ञों का मानना है कि यह समझौता आने वाले वर्षों में दोनों देशों के आर्थिक संबंधों को नई ऊंचाई पर पहुंचा सकता है और भारतीय ऑटोमोबाइल बाजार में बड़े बदलाव का कारण बन सकता है।