15 साल बाद लौटेगा फॉर्मूला वन रोमांच
भारत में करीब 15 वर्ष बाद फॉर्मूला वन रेसिंग की वापसी की तैयारी शुरू हो गई है। केंद्र सरकार ने 2028 तक इंडियन ग्रां प्री आयोजित कराने का लक्ष्य तय किया है और इसके लिए एक विशेष कार्यबल गठित करने की घोषणा की है। सरकार का मानना है कि यह आयोजन खेल के साथ-साथ पर्यटन और अर्थव्यवस्था को भी नई गति देगा।
दि राइजिंग न्यूज़ | नई दिल्ली | 21 जून 2026
भारत में फिर गूंजेगी रफ्तार की गर्जना
भारतीय मोटरस्पोर्ट प्रेमियों के लिए बड़ी खुशखबरी सामने आई है। करीब 15 साल बाद देश में एक बार फिर फॉर्मूला वन रेसिंग का रोमांच लौट सकता है। केंद्र सरकार ने वर्ष 2028 तक इंडियन ग्रां प्री आयोजित कराने का लक्ष्य तय करते हुए इस दिशा में औपचारिक प्रक्रिया शुरू कर दी है।केंद्रीय खेल मंत्री मनसुख मांडविया ने घोषणा की है कि भारत में फॉर्मूला वन की वापसी की संभावनाओं का अध्ययन करने के लिए एक विशेष कार्यबल का गठन किया जाएगा। यह दल देश में मोटरस्पोर्ट्स की वर्तमान स्थिति, चुनौतियों और अवसरों का विस्तृत आकलन करेगा।
विशेष कार्यबल तैयार करेगा रोडमैप
खेल मंत्रालय के अनुसार चार से पांच सदस्यों वाला यह कार्यबल मोटरस्पोर्ट्स के लिए आवश्यक बुनियादी ढांचे, निवेश, संचालन व्यवस्था और अंतरराष्ट्रीय मानकों का अध्ययन करेगा। इसके आधार पर भारत में फॉर्मूला वन की वापसी के लिए विस्तृत रोडमैप तैयार किया जाएगा।सरकार का लक्ष्य अगले वर्ष तक आवश्यक ढांचा तैयार करना है ताकि 2028 तक भारत को फिर से फॉर्मूला वन कैलेंडर में शामिल कराया जा सके।
2013 के बाद नहीं हुई कोई रेस
भारत ने वर्ष 2011 से 2013 तक उत्तर प्रदेश के ग्रेटर नोएडा स्थित बुद्ध इंटरनेशनल सर्किट में सफलतापूर्वक फॉर्मूला वन रेस की मेजबानी की थी। उस दौरान दुनिया के कई दिग्गज चालक भारतीय ट्रैक पर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर चुके हैं।हालांकि कर संबंधी विवादों और वित्तीय चुनौतियों के कारण इंडियन ग्रां प्री को बाद में फॉर्मूला वन कैलेंडर से हटा दिया गया था। इसके बाद से भारतीय प्रशंसक इस प्रतिष्ठित प्रतियोगिता की वापसी का इंतजार कर रहे थे।
तेजी से बढ़ रहा है प्रशंसक वर्ग
फॉर्मूला वन प्रबंधन लंबे समय से भारत को एक महत्वपूर्ण बाजार के रूप में देखता रहा है। हाल के वर्षों में देश में इस खेल की लोकप्रियता में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है।उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2025 के अंत तक भारत में फॉर्मूला वन के प्रशंसकों की संख्या लगभग 7.9 करोड़ थी, जो कुछ ही महीनों में बढ़कर 9.8 करोड़ तक पहुंच गई। यह वृद्धि भारत को दुनिया के सबसे तेजी से उभरते मोटरस्पोर्ट बाजारों में शामिल कर रही है।
अर्थव्यवस्था को भी मिलेगा लाभ
सरकार का मानना है कि फॉर्मूला वन की वापसी केवल खेल तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि इसका सीधा लाभ पर्यटन, होटल उद्योग, परिवहन, विज्ञापन, निवेश और रोजगार जैसे क्षेत्रों को भी मिलेगा।अंतरराष्ट्रीय स्तर के ऐसे आयोजन लाखों दर्शकों और पर्यटकों को आकर्षित करते हैं, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को नई ऊर्जा मिलती है। इसके अलावा वैश्विक स्तर पर भारत की पहचान और ब्रांड मूल्य भी मजबूत होती है।
प्ले इन इंडिया अभियान को मिलेगी मजबूती
केंद्रीय खेल मंत्री मनसुख मांडविया ने कहा कि मोटरस्पोर्ट्स को सरकार की "प्ले इन इंडिया" पहल का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया जाएगा। उनका मानना है कि फॉर्मूला वन के आसपास एक व्यापक खेल और व्यापारिक पारिस्थितिकी तंत्र विकसित किया जा सकता है।उन्होंने कहा कि भारत में प्रतिभा, बाजार और दर्शकों की कोई कमी नहीं है। सही योजना और निवेश के माध्यम से देश वैश्विक मोटरस्पोर्ट्स मानचित्र पर मजबूत उपस्थिति दर्ज करा सकता है।
विभिन्न पक्षों के साथ चल रही चर्चा
फॉर्मूला वन की संभावित वापसी को लेकर खेल मंत्रालय, भारतीय मोटरस्पोर्ट महासंघ, उत्तर प्रदेश सरकार और बुद्ध इंटरनेशनल सर्किट से जुड़े प्रतिनिधियों के बीच लगातार विचार-विमर्श जारी है।हाल ही में फॉर्मूला वन प्रबंधन, युवा रेसरों और मोटरस्पोर्ट विशेषज्ञों के साथ भी बैठक आयोजित की गई थी। फॉर्मूला वन के मुख्य कार्यकारी अधिकारी स्टेफानो डोमेनिकाली पहले ही भारत को खेल के लिए एक अत्यंत महत्वपूर्ण और संभावनाओं से भरा बाजार बता चुके हैं।अब यदि सभी योजनाएं तय समय पर आगे बढ़ती हैं तो वर्ष 2028 में भारतीय प्रशंसकों को एक बार फिर दुनिया की सबसे प्रतिष्ठित मोटर रेसिंग प्रतियोगिता का रोमांच अपने देश में देखने को मिल सकता है।