इस्तीफे की पेशकश कर भावुक हुए उद्धव

शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा कि यदि नेताओं और कार्यकर्ताओं को लगता है कि वह शिवसेना प्रमुख पद के लिए उपयुक्त नहीं हैं तो वह पद छोड़ने के लिए तैयार हैं। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि वह राजनीतिक संघर्ष से पीछे हटने वाले नहीं हैं।

इस्तीफे की पेशकश कर भावुक हुए उद्धव

दि राइजिंग न्यूज़ | मुंबई | 20 जून 2026

पार्टी कार्यकर्ताओं के सामने रखी बड़ी बात

शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने पार्टी में जारी राजनीतिक चुनौतियों और अंदरूनी असंतोष की चर्चाओं के बीच बड़ा बयान दिया है। पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि यदि नेताओं और कार्यकर्ताओं को लगता है कि वह शिवसेना प्रमुख पद की जिम्मेदारी निभाने के लिए उपयुक्त नहीं हैं तो वह पद छोड़ने के लिए तैयार हैं।उन्होंने कहा कि संगठन में किसी भी योग्य व्यक्ति को नेतृत्व सौंपने में उन्हें कोई आपत्ति नहीं होगी, लेकिन वह अपने राजनीतिक संघर्ष से पीछे हटने वाले नहीं हैं।

संघर्ष जारी रखने का किया ऐलान

उद्धव ठाकरे ने कहा कि कुछ लोगों को उम्मीद है कि पार्टी में टूट और राजनीतिक घटनाक्रम के बाद उनका मनोबल कमजोर हो जाएगा, लेकिन ऐसा नहीं होगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि वह हर परिस्थिति में संघर्ष जारी रखेंगे और चुनौतियों का सामना करेंगे।उन्होंने कहा कि नेतृत्व का फैसला अंततः कार्यकर्ताओं और पार्टी के लोगों को करना है। जिस दिन उन्हें लगेगा कि कोई और व्यक्ति बेहतर तरीके से संगठन का नेतृत्व कर सकता है, वह पद छोड़ने में संकोच नहीं करेंगे।

ऑपरेशन तोड़वा का किया जिक्र

अपने संबोधन में उद्धव ठाकरे ने पार्टी में हुई टूट और राजनीतिक घटनाक्रम का उल्लेख करते हुए कहा कि कुछ लोग लगातार संगठन को कमजोर करने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने इसे 'ऑपरेशन तोड़वा' की संज्ञा दी।उन्होंने कहा कि शिवसेना संस्थापक बालासाहेब ठाकरे हमेशा पार्टी के साथ विश्वासघात करने वालों का लोकतांत्रिक और राजनीतिक तरीके से जवाब देने की बात करते थे। उसी विचारधारा के साथ पार्टी आगे बढ़ रही है।

चुनावी प्रदर्शन को बताया असली पैमाना

उद्धव ठाकरे ने कहा कि किसी भी राजनीतिक दल की सफलता का मूल्यांकन चुनावी नतीजों के आधार पर किया जाना चाहिए। उन्होंने पूर्व केंद्रीय गृह मंत्री इंद्रजीत गुप्ता के साथ बालासाहेब ठाकरे की एक चर्चा का उल्लेख करते हुए कहा कि सत्ता कभी भी शिवसेना की प्राथमिकता नहीं रही।उनके अनुसार पार्टी का मूल उद्देश्य विचारधारा और जनता के हितों के लिए संघर्ष करना रहा है।

कांग्रेस के साथ गठबंधन पर दिया जवाब

कांग्रेस के साथ गठबंधन को लेकर उठ रहे सवालों पर उद्धव ठाकरे ने कहा कि शिवसेना ने तीन दशक तक भारतीय जनता पार्टी के साथ गठबंधन किया था, लेकिन कभी अपनी अलग पहचान नहीं खोई।उन्होंने कहा कि जब भाजपा के साथ लंबे समय तक रहने के बावजूद पार्टी का विलय नहीं हुआ तो कांग्रेस में विलय होने का सवाल ही नहीं उठता। उन्होंने स्पष्ट किया कि गठबंधन और संगठन की स्वतंत्र पहचान दो अलग-अलग बातें हैं।

भाजपा पर साधा निशाना

उद्धव ठाकरे ने भाजपा पर हमला बोलते हुए दावा किया कि शिवसेना के समर्थन के बिना भाजपा महाराष्ट्र में इतनी मजबूत स्थिति तक नहीं पहुंच पाती। उन्होंने कहा कि वर्तमान राजनीतिक परिस्थितियों में भाजपा भी कई चुनौतियों का सामना कर रही है।उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि राज्य की राजनीति में कुछ ताकतें लगातार शिवसेना को कमजोर करने की कोशिश कर रही हैं।

कांग्रेस को लेकर कही सकारात्मक बात

अपने संबोधन में उद्धव ठाकरे ने कांग्रेस के साथ संबंधों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि अतीत में दोनों दलों के बीच वैचारिक मतभेद रहे हैं, लेकिन कांग्रेस ने कभी उनके परिवार या 'मातोश्री' का अपमान नहीं किया।उन्होंने कहा कि राजनीतिक सहयोग के दौरान कांग्रेस ने अपने कई वादों को निभाया है, जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

कार्यकर्ताओं को दिया भावनात्मक संदेश

उद्धव ठाकरे ने कार्यकर्ताओं से कहा कि संगठन की ताकत ही उनकी सबसे बड़ी पूंजी है। उन्होंने भरोसा जताया कि पार्टी के कार्यकर्ता हर चुनौती का सामना करने में सक्षम हैं और संगठन को मजबूत बनाए रखेंगे।उन्होंने दोहराया कि यदि कार्यकर्ताओं को लगता है कि कोई अन्य व्यक्ति बेहतर नेतृत्व दे सकता है तो वह शिवसेना प्रमुख का पद छोड़ने को तैयार हैं, लेकिन पार्टी और विचारधारा के लिए उनका संघर्ष जारी रहेगा।