चीनी पोल्ट्री उपकरणों पर उठे गंभीर सवाल

इंडियन पोल्ट्री इक्विपमेंट मैन्युफैक्चरिंग एसोसिएशन ने चीन से आयात होने वाले पोल्ट्री उपकरणों की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल उठाए हैं। संगठन का दावा है कि निम्न गुणवत्ता वाले प्लास्टिक से बने उपकरण मुर्गियों की सेहत के साथ-साथ अंडे और चिकन की गुणवत्ता को भी प्रभावित कर सकते हैं। मामले में केंद्र सरकार और संबंधित मंत्रालयों से जांच की मांग की गई है।

चीनी पोल्ट्री उपकरणों पर उठे गंभीर सवाल

दि राइजिंग न्यूज़ | नई दिल्ली | 18 जून 2026

पोल्ट्री उपकरणों की गुणवत्ता पर चिंता

इंडियन पोल्ट्री इक्विपमेंट मैन्युफैक्चरिंग एसोसिएशन (आईपीमा) ने चीन से आयात किए जा रहे पोल्ट्री उपकरणों को लेकर गंभीर चिंताएं व्यक्त की हैं। संगठन का आरोप है कि भारतीय बाजार में बड़ी मात्रा में निम्न गुणवत्ता वाले उपकरण पहुंच रहे हैं, जिनका उपयोग पोल्ट्री फार्मों में किया जा रहा है। आईपीमा का कहना है कि ऐसे उपकरण न केवल मुर्गियों की सेहत के लिए खतरा बन सकते हैं, बल्कि उनके माध्यम से उत्पादित अंडों और चिकन की गुणवत्ता पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका है।

निम्न गुणवत्ता वाले प्लास्टिक के इस्तेमाल का आरोप

आईपीमा के अध्यक्ष उदय सिंह बयास के अनुसार चीन से आयात किए जा रहे कई उपकरणों में निम्न श्रेणी के प्लास्टिक का उपयोग किया जा रहा है। इनमें मुर्गियों को पानी पिलाने वाले ड्रिंकर और चारा उपलब्ध कराने वाले फीडर जैसे उपकरण भी शामिल हैं। उनका दावा है कि ऐसे प्लास्टिक में विषैले तत्व मौजूद हो सकते हैं, जो लंबे समय तक उपयोग के दौरान मुर्गियों के स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकते हैं। उन्होंने आशंका जताई कि इससे अंडों और चिकन में भी अवांछित तत्व पहुंच सकते हैं।

भारी धातुओं का बढ़ सकता है खतरा

आईपीमा ने यह भी दावा किया है कि कुछ आयातित उपकरणों में सीसा, भारी धातुओं और अन्य हानिकारक पदार्थों के उपयोग का जोखिम हो सकता है। संगठन का मानना है कि यदि ऐसे उत्पादों की गुणवत्ता की सख्ती से जांच नहीं की गई तो यह पशुपालन क्षेत्र के लिए चिंता का विषय बन सकता है। हालांकि इन दावों की आधिकारिक पुष्टि के लिए किसी सरकारी जांच रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है।

सरकार से जांच की मांग

आईपीमा ने पशुपालन एवं डेयरी मंत्रालय के साथ-साथ प्रधानमंत्री कार्यालय से भी इस मामले की जांच कराने की मांग की है। संगठन का कहना है कि देश में आयात होने वाले पोल्ट्री उपकरणों की गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों की विस्तृत जांच की जानी चाहिए। संस्था का मानना है कि उचित परीक्षण और प्रमाणन के बाद ही ऐसे उपकरणों को भारतीय बाजार में प्रवेश की अनुमति मिलनी चाहिए।

जागरूकता अभियान शुरू

पोल्ट्री क्षेत्र में बढ़ती चिंताओं को देखते हुए आईपीमा ने जागरूकता अभियान भी शुरू किया है। संगठन का उद्देश्य किसानों और पोल्ट्री फार्म संचालकों को उपकरणों की गुणवत्ता के महत्व के बारे में जानकारी देना है। संगठन का कहना है कि कई किसान कम कीमत के कारण ऐसे उपकरण खरीद लेते हैं, लेकिन लंबे समय में यह उनके व्यवसाय और उत्पादन गुणवत्ता दोनों के लिए नुकसानदायक साबित हो सकता है।

भारतीय उद्योग की क्षमता पर जताया भरोसा

उदय सिंह बयास ने कहा कि भारत पोल्ट्री उपकरण निर्माण के क्षेत्र में पूरी तरह सक्षम है। देश की कंपनियां घरेलू मांग को पूरा करने के साथ-साथ विदेशों में भी उपकरणों का निर्यात कर रही हैं। उन्होंने बताया कि कई यूरोपीय देश भी भारतीय निर्माताओं से पोल्ट्री उपकरण खरीदते हैं। यूरोपीय बाजारों में गुणवत्ता मानक बेहद सख्त होते हैं, फिर भी भारतीय कंपनियां उन मानकों को पूरा करने में सफल रही हैं।

आयात शुल्क बढ़ाने की मांग

आईपीमा ने सरकार से पोल्ट्री उपकरणों के आयात शुल्क ढांचे की समीक्षा करने का आग्रह किया है। संगठन का मानना है कि उचित आयात नीति के माध्यम से घरेलू उद्योग को प्रोत्साहन दिया जा सकता है और निम्न गुणवत्ता वाले उत्पादों की आमद पर रोक लगाई जा सकती है। संगठन ने सुझाव दिया है कि पोल्ट्री उपकरणों से संबंधित आयात श्रेणी की समीक्षा कर शुल्क संरचना को अधिक प्रभावी बनाया जाए।

गुणवत्ता जांच को सख्त बनाने की सिफारिश

आईपीमा ने आयातित पोल्ट्री मशीनरी और उपकरणों के लिए अनिवार्य गुणवत्ता जांच की मांग भी की है। संगठन का कहना है कि सभी उत्पादों को निर्धारित मानकों पर परखा जाना चाहिए ताकि केवल सुरक्षित और प्रमाणित उपकरण ही बाजार में पहुंच सकें। इस कदम से किसानों और उपभोक्ताओं दोनों के हितों की रक्षा की जा सकती है।

मेक इन इंडिया को बढ़ावा देने की मांग

संगठन ने सरकार से आग्रह किया है कि विभिन्न सब्सिडी योजनाओं, संस्थागत खरीद और सरकारी परियोजनाओं में भारतीय निर्मित पोल्ट्री उपकरणों को प्राथमिकता दी जाए। आईपीमा का मानना है कि इससे घरेलू विनिर्माण को मजबूती मिलेगी और देश में रोजगार तथा निवेश के नए अवसर पैदा होंगे।

एमएसएमई क्षेत्र को सहयोग की जरूरत

पोल्ट्री उपकरण निर्माण से जुड़े सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योगों को तकनीकी उन्नयन, आसान वित्तीय सहायता और निर्यात प्रोत्साहन उपलब्ध कराने की भी मांग की गई है। संगठन का कहना है कि यदि इन इकाइयों को पर्याप्त समर्थन मिला तो वे वैश्विक स्तर पर और अधिक प्रतिस्पर्धी बन सकेंगी।

निगरानी तंत्र मजबूत करने की अपील

आईपीमा ने आयातित उपकरणों में कथित अंडर-इनवॉयसिंग और अनुचित मूल्य निर्धारण की जांच के लिए प्रभावी निगरानी तंत्र स्थापित करने का सुझाव भी दिया है। संगठन का मानना है कि पारदर्शी और सख्त निगरानी व्यवस्था से बाजार में निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा सुनिश्चित की जा सकेगी तथा गुणवत्ता मानकों का पालन भी बेहतर तरीके से हो पाएगा। पोल्ट्री उद्योग देश के कृषि और पशुपालन क्षेत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा है। ऐसे में उपकरणों की गुणवत्ता, पशु स्वास्थ्य और खाद्य सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर उठी चिंताओं ने इस विषय को उद्योग और नीति निर्माताओं के बीच चर्चा का केंद्र बना दिया है।