ईरान-अमेरिका डील से इजरायल नाराज
अमेरिका और ईरान के बीच हुए 14 सूत्रीय शांति समझौते पर इजरायल ने असंतोष जताया है। भारत में इजरायल के राजदूत रियूवेन अजार ने कहा कि समझौते में बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम और ईरान समर्थित संगठनों से जुड़े सुरक्षा मुद्दों को नजरअंदाज किया गया है।
दि राइजिंग न्यूज़ | नई दिल्ली | 19 जून 2026
अमेरिका-ईरान समझौते पर इजरायल की आपत्ति
अमेरिका और ईरान के बीच हाल ही में हुए शांति समझौते को लेकर इजरायल ने गंभीर चिंता जताई है। भारत में इजरायल के राजदूत रियूवेन अजार ने कहा है कि इस समझौते में इजरायल की प्रमुख सुरक्षा चिंताओं का समाधान नहीं किया गया है। उनका मानना है कि यदि इन मुद्दों को नजरअंदाज किया गया तो भविष्य में क्षेत्र में एक बार फिर तनाव और संघर्ष की स्थिति पैदा हो सकती है। एक विशेष बातचीत में राजदूत अजार ने कहा कि ईरान के बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम और उसके द्वारा समर्थित प्रॉक्सी संगठनों की गतिविधियां इजरायल के लिए सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई हैं। लेकिन अमेरिका और ईरान के बीच हुए नए समझौते में इन दोनों विषयों पर कोई ठोस व्यवस्था नहीं की गई है।
बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम पर चिंता
इजरायल लंबे समय से ईरान के बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम का विरोध करता रहा है। इजरायली नेतृत्व का मानना है कि ईरान की मिसाइल क्षमताएं पूरे मध्य पूर्व की सुरक्षा के लिए खतरा बन सकती हैं। राजदूत अजार ने कहा कि इस समझौते में मिसाइल कार्यक्रम पर कोई स्पष्ट प्रतिबंध या नियंत्रण तंत्र शामिल नहीं है। उनके अनुसार यह एक ऐसी कमी है जो भविष्य में नए संकट को जन्म दे सकती है। उन्होंने कहा कि इजरायल के लिए बैलिस्टिक मिसाइलों का मुद्दा अत्यंत संवेदनशील है और इसे किसी भी शांति प्रक्रिया में नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।
प्रॉक्सी संगठनों को समर्थन भी बड़ा मुद्दा
इजरायल की दूसरी बड़ी चिंता उन संगठनों को लेकर है जिन्हें वह ईरान समर्थित मानता है। इनमें लेबनान का हिज्बुल्लाह और गाजा पट्टी में सक्रिय हमास प्रमुख हैं। इजरायल का आरोप है कि इन संगठनों को ईरान आर्थिक सहायता, हथियार और प्रशिक्षण उपलब्ध कराता है। राजदूत अजार ने कहा कि जब तक इन समूहों को मिलने वाला समर्थन बंद नहीं होता तब तक क्षेत्र में स्थायी शांति स्थापित करना मुश्किल होगा। उन्होंने कहा कि समझौते में इस विषय पर भी कोई ठोस समाधान नहीं निकाला गया है, जिससे इजरायल की सुरक्षा चिंताएं बनी हुई हैं।
परमाणु कार्यक्रम पर भी बरकरार है चिंता
हालांकि समझौते के तहत ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर अगले 60 दिनों तक विस्तृत बातचीत का प्रावधान किया गया है, लेकिन इजरायल अभी भी पूरी तरह संतुष्ट नहीं है। राजदूत अजार ने कहा कि परमाणु गतिविधियों को लेकर भी कई सवाल बने हुए हैं। इजरायल चाहता है कि ईरान के यूरेनियम संवर्धन कार्यक्रम और परमाणु गतिविधियों पर सख्त निगरानी रखी जाए ताकि भविष्य में किसी प्रकार का सैन्य खतरा पैदा न हो।
क्या है अमेरिका-ईरान का नया समझौता
बुधवार को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने 14 बिंदुओं वाले एक समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। इस समझौते का उद्देश्य मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव को कम करना और लंबे समय से जारी संघर्ष को रोकना बताया गया है। इस समझौते के बाद दोनों देशों के बीच एक नई वार्ता प्रक्रिया शुरू होगी, जिसमें मुख्य रूप से ईरान के परमाणु कार्यक्रम और संवर्धित यूरेनियम के भंडार पर चर्चा की जाएगी। यह समझौता क्षेत्र में स्थिरता लाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम हो सकता है, लेकिन कई जटिल मुद्दे अभी भी अनसुलझे हैं।
लेबनान को लेकर भी बढ़ी नाराजगी
इजरायल की असहमति का एक और बड़ा कारण लेबनान से जुड़ा प्रावधान है। रिपोर्टों के अनुसार ईरान की मांग पर लेबनान को भी समझौते के ढांचे में शामिल किया गया है। समझौते के तहत इजरायल की लेबनान में सैन्य गतिविधियों पर कुछ सीमाएं लगाने की बात कही गई है। इसे लेकर इजरायल ने आपत्ति जताई है और कहा है कि उसकी सुरक्षा आवश्यकताओं को ध्यान में नहीं रखा गया। हालांकि राजदूत अजार ने स्पष्ट किया कि इजरायल दक्षिणी लेबनान में अपनी रणनीतिक मौजूदगी बनाए रखेगा और अपनी सुरक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाता रहेगा।
मध्य पूर्व में नए समीकरणों की शुरुआत
अमेरिका और ईरान के बीच हुए इस समझौते को मध्य पूर्व की राजनीति में एक महत्वपूर्ण मोड़ माना जा रहा है। इससे क्षेत्र में तनाव कम होने की उम्मीद जरूर बढ़ी है, लेकिन इजरायल की चिंताओं ने यह संकेत दिया है कि शांति प्रक्रिया अभी आसान नहीं होगी।यदि मिसाइल कार्यक्रम, प्रॉक्सी संगठनों और सुरक्षा गारंटी जैसे मुद्दों का समाधान नहीं हुआ तो भविष्य में फिर से टकराव की आशंका बनी रह सकती है। फिलहाल दुनिया की नजरें अगले 60 दिनों की वार्ता प्रक्रिया पर टिकी हैं, जहां यह तय होगा कि यह समझौता स्थायी शांति की दिशा में कितना सफल साबित होता है।