2400 गांवों के किसानों को बड़ी राहत
बिहार के दरभंगा और मधुबनी जिलों में रैयाम और सकरी सहकारी चीनी मिलों को दोबारा शुरू करने की प्रक्रिया तेज हो गई है। इस परियोजना से 2401 गांवों के गन्ना किसानों को सीधा लाभ मिलेगा और क्षेत्र में रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।
दि राइजिंग न्यूज़ | पटना | 19 जून 2026
2400 गांवों के किसानों को बड़ी राहत
बिहार के गन्ना किसानों के लिए एक महत्वपूर्ण और राहतभरी खबर सामने आई है। राज्य के दरभंगा और मधुबनी जिलों में वर्षों से बंद पड़ी रैयाम और सकरी चीनी मिलों को दोबारा शुरू करने की दिशा में सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। सहकारिता विभाग और गन्ना उद्योग विभाग की पहल के बाद अब इन दोनों मिलों के पुनरुद्धार की प्रक्रिया तेज हो गई है। इस परियोजना से 2401 गांवों के किसानों को सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है।
चीनी मिलों के पुनरुद्धार को मिली रफ्तार
बिहार सरकार लंबे समय से बंद पड़ी चीनी मिलों को फिर से चालू करने की योजना पर काम कर रही है। इसी क्रम में रैयाम और सकरी स्थित सहकारी चीनी मिलों को दोबारा शुरू करने के लिए प्राथमिक चीनी मिल सहकारी समितियों के गठन की अनुमति दे दी गई है।इन समितियों में सदस्य के रूप में स्थानीय गन्ना उत्पादक किसानों को शामिल किया जाएगा। इससे किसानों की सीधी भागीदारी सुनिश्चित होगी और उन्हें उत्पादन से लेकर विपणन तक बेहतर अवसर प्राप्त होंगे।
2401 गांव किए गए आरक्षित
गन्ना उद्योग विभाग ने दोनों चीनी मिलों के लिए क्षेत्र निर्धारण करते हुए अधिसूचना जारी कर दी है। अधिसूचना के अनुसार रैयाम और सकरी चीनी मिलों के लिए कुल 2401 गांव आरक्षित किए गए हैं।इन गांवों के किसान अपनी गन्ना फसल सीधे मिलों को बेच सकेंगे। इससे किसानों को लंबी दूरी तय नहीं करनी पड़ेगी और परिवहन लागत में भी कमी आएगी।
किसानों के लिए तय किए गए नियम
सहकारी समितियों में सदस्यता के लिए कुछ पात्रता शर्तें निर्धारित की गई हैं।सामान्य वर्ग के किसानों के पास कम से कम 100 डिसमिल भूमि पर गन्ना उत्पादन होना चाहिए या गन्ना खेती करने की इच्छा होनी चाहिए।वहीं अनुसूचित जाति, पिछड़ा वर्ग, अति पिछड़ा वर्ग और महिला किसानों के लिए यह सीमा 50 डिसमिल निर्धारित की गई है ताकि अधिक से अधिक छोटे और सीमांत किसान इस योजना का लाभ उठा सकें।
डीबीटी पोर्टल पर पंजीकरण अनिवार्य
समिति का सदस्य बनने के लिए किसानों का कृषि विभाग के डीबीटी पोर्टल पर पंजीकरण होना आवश्यक होगा।सरकार का उद्देश्य पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी और डिजिटल बनाना है ताकि वास्तविक किसानों तक लाभ पहुंच सके और किसी प्रकार की अनियमितता की संभावना न रहे।
सदस्यता शुल्क और अंश पूंजी
सहकारी समिति की सदस्यता लेने के लिए किसानों को 500 रुपये प्रवेश शुल्क देना होगा। इसके अलावा एक अंश का मूल्य 1000 रुपये निर्धारित किया गया है।यह व्यवस्था किसानों को सहकारी मॉडल का भागीदार बनाने और मिलों के संचालन में उनकी हिस्सेदारी सुनिश्चित करने के उद्देश्य से की गई है।
जल्द शुरू होगा ऑनलाइन पोर्टल
किसानों की सुविधा के लिए सरकार विशेष ऑनलाइन पोर्टल तैयार कर रही है। इस पोर्टल के माध्यम से किसान घर बैठे सदस्यता के लिए आवेदन कर सकेंगे।इसके अलावा समिति गठन और आवश्यक दस्तावेजी प्रक्रिया पूरी करने के लिए दो सदस्यीय संगठनकर्ता समिति का भी गठन किया गया है, जो पूरे कार्य की निगरानी करेगी।
किसानों की आय बढ़ने की उम्मीद
यदि परियोजना निर्धारित समयसीमा में पूरी हो जाती है तो इससे गन्ना किसानों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है।स्थानीय स्तर पर गन्ने की खरीद होने से किसानों को उचित मूल्य मिलने की संभावना बढ़ेगी और बिचौलियों पर उनकी निर्भरता कम होगी।
रोजगार के नए अवसर बनेंगे
चीनी मिलों के पुनः संचालन से केवल किसानों को ही लाभ नहीं मिलेगा बल्कि स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।मिलों के संचालन, परिवहन, गोदाम, रखरखाव और अन्य संबंधित गतिविधियों में बड़ी संख्या में लोगों को रोजगार मिलने की संभावना है। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।
बिहार के गन्ना उद्योग को मिलेगा नया जीवन
एक समय बिहार देश के प्रमुख गन्ना उत्पादक राज्यों में शामिल था, लेकिन कई चीनी मिलों के बंद होने से किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ा। अब रैयाम और सकरी चीनी मिलों के पुनरुद्धार से राज्य के गन्ना उद्योग को नई ऊर्जा मिलने की उम्मीद है।सरकार का मानना है कि यह पहल किसानों की आय बढ़ाने, ग्रामीण क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियों को प्रोत्साहित करने और सहकारिता मॉडल को मजबूत बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित होगी। यदि योजना सफल रहती है तो आने वाले समय में राज्य की अन्य बंद चीनी मिलों के पुनर्जीवन का रास्ता भी खुल सकता है।