15 जुलाई से लागू होगा भारत-ब्रिटेन एफटीए

भारत और ब्रिटेन के बीच ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौता 15 जुलाई 2026 से लागू होने जा रहा है। समझौते के लागू होते ही व्हिस्की, लग्जरी कारों, कॉस्मेटिक और अन्य ब्रिटिश उत्पादों पर आयात शुल्क में बड़ी कटौती होगी। वहीं भारतीय निर्यातकों को भी ब्रिटिश बाजार में नए अवसर मिलेंगे।

15 जुलाई से लागू होगा भारत-ब्रिटेन एफटीए

दि राइजिंग न्यूज़ | नई दिल्ली | 19 जून 2026

भारत-ब्रिटेन व्यापार संबंधों में नया अध्याय

भारत और ब्रिटेन के बीच लंबे समय से चर्चा में रहा मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) अब 15 जुलाई 2026 से प्रभावी होने जा रहा है। दोनों देशों ने इसकी आधिकारिक घोषणा करते हुए इसे द्विपक्षीय आर्थिक संबंधों के लिए एक ऐतिहासिक कदम बताया है।समझौते के लागू होने के साथ ही कई उत्पादों पर आयात शुल्क में बड़ी कटौती होगी, जिससे उपभोक्ताओं को सीधे लाभ मिलने की उम्मीद है। वहीं भारतीय निर्यातकों के लिए ब्रिटिश बाजार में नए अवसर भी खुलेंगे।

व्हिस्की पर सबसे बड़ी राहत

एफटीए का सबसे बड़ा प्रभाव स्कॉच व्हिस्की बाजार पर देखने को मिल सकता है। वर्तमान में भारत में ब्रिटिश व्हिस्की पर 150 प्रतिशत तक आयात शुल्क लगाया जाता है। समझौते के तहत इस शुल्क को घटाकर 40 प्रतिशत किया जाएगा। इससे ब्रिटिश व्हिस्की की कीमतों में उल्लेखनीय कमी आने की संभावना है और भारतीय उपभोक्ताओं को प्रीमियम उत्पाद अपेक्षाकृत कम कीमत पर मिल सकेंगे। इससे स्कॉच व्हिस्की उद्योग को भारत जैसे बड़े बाजार में नई गति मिलेगी।

लग्जरी कारें भी होंगी सस्ती

ऑटोमोबाइल क्षेत्र को भी इस समझौते से बड़ा लाभ मिलने की उम्मीद है। निर्धारित कोटा प्रणाली के तहत ब्रिटिश कारों पर आयात शुल्क को 100 प्रतिशत से घटाकर 10 प्रतिशत तक किया जाएगा। इससे जगुआर लैंड रोवर, मैकलारेन और अन्य ब्रिटिश वाहन निर्माताओं की कारों की कीमतों में कमी आने की संभावना है। उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि इससे भारतीय प्रीमियम कार बाजार में प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी और ग्राहकों को अधिक विकल्प मिलेंगे।

ब्यूटी और कॉस्मेटिक उत्पादों पर भी असर

एफटीए के तहत कॉस्मेटिक, ब्यूटी और कई उपभोक्ता उत्पादों पर लगने वाले 22 प्रतिशत तक के शुल्क को चरणबद्ध तरीके से समाप्त किया जाएगा। कुछ उत्पादों पर यह राहत तत्काल प्रभाव से मिलेगी, जबकि कुछ श्रेणियों में अगले दस वर्षों के दौरान शुल्क पूरी तरह समाप्त किए जाएंगे। इससे अंतरराष्ट्रीय ब्रांडों के उत्पादों की कीमतों में कमी आने की उम्मीद है।

भारतीय निर्यातकों को भी मिलेगा लाभ

समझौते का फायदा केवल ब्रिटिश कंपनियों को ही नहीं मिलेगा। ब्रिटेन भी भारतीय उत्पादों पर शुल्क कम करेगा, जिससे भारतीय निर्यातकों को बड़ा बाजार उपलब्ध होगा। कपड़ा उद्योग, जूता उद्योग, खाद्य उत्पाद, कृषि आधारित वस्तुएं और कई विनिर्माण क्षेत्र इस समझौते से लाभान्वित हो सकते हैं।  इससे भारतीय एमएसएमई और स्टार्टअप क्षेत्र को भी नई संभावनाएं मिलेंगी।

व्यापार में होगी बड़ी वृद्धि

ब्रिटिश अनुमानों के अनुसार यह समझौता दोनों देशों के बीच वार्षिक व्यापार में लगभग 25.5 अरब पाउंड की अतिरिक्त वृद्धि कर सकता है। इसके अलावा ब्रिटेन की अर्थव्यवस्था में 4.8 अरब पाउंड तक का योगदान और वास्तविक वेतन में 2.2 अरब पाउंड तक की वृद्धि का अनुमान लगाया गया है। ब्रिटेन इस समझौते को भारत के साथ अब तक का सबसे व्यापक व्यापार करार बता रहा है।

व्यवसायों को मिली तैयारी की मोहलत

दोनों देशों की सरकारों ने समझौते को लागू करने से पहले व्यवसायों को 28 दिनों का समय दिया है ताकि वे अपने व्यापारिक सिस्टम और प्रक्रियाओं को नई व्यवस्था के अनुरूप तैयार कर सकें। इस अवधि में कंपनियां आवश्यक पंजीकरण और दस्तावेजी प्रक्रियाएं पूरी करेंगी ताकि 15 जुलाई से नए नियमों के तहत व्यापार शुरू किया जा सके।

प्रधानमंत्री मोदी ने जताई खुशी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस समझौते को भारत-ब्रिटेन संबंधों के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि बताया है। उन्होंने कहा कि यह समझौता दोनों देशों के बीच व्यापार और निवेश को नई ऊंचाइयों तक ले जाएगा। साथ ही किसानों, श्रमिकों, सूक्ष्म एवं लघु उद्योगों और स्टार्टअप क्षेत्र के लिए नए अवसर पैदा करेगा। प्रधानमंत्री ने कहा कि यह करार विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को हासिल करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

उपभोक्ताओं को मिलेगा सीधा फायदा

विशेषज्ञों का मानना है कि एफटीए का सबसे बड़ा लाभ आम उपभोक्ताओं को मिलेगा। कम आयात शुल्क के कारण कई विदेशी उत्पादों की कीमतों में कमी आएगी और बाजार में प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी। वहीं भारतीय उद्योगों को निर्यात बढ़ाने का अवसर मिलेगा, जिससे रोजगार और आर्थिक गतिविधियों में भी वृद्धि होने की उम्मीद है। 15 जुलाई से लागू होने वाला यह समझौता भारत और ब्रिटेन के आर्थिक संबंधों में एक नए युग की शुरुआत माना जा रहा है, जिसका प्रभाव आने वाले वर्षों में व्यापार, निवेश और उपभोक्ता बाजार पर व्यापक रूप से दिखाई दे सकता है।