ईरान-अमेरिका डील के बीच भड़के बिलावल, भारत को दी धमकी
सिंधु जल संधि को लेकर पाकिस्तान ने एक बार फिर भारत के खिलाफ आक्रामक रुख अपनाया है। पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी के अध्यक्ष बिलावल भुट्टो जरदारी ने कहा है कि पाकिस्तान अपने हिस्से के पानी पर किसी भी प्रकार का समझौता नहीं करेगा और पानी रोकने की किसी भी कोशिश का जवाब देगा। भारत ने संयुक्त राष्ट्र में स्पष्ट किया है कि आतंकवाद समाप्त किए बिना संबंधों में सामान्य स्थिति संभव नहीं है।
दि राइजिंग न्यूज़ | नई दिल्ली | 19 जून 2026
पाकिस्तान ने फिर दिखाई आक्रामकता
ईरान और अमेरिका के बीच हालिया समझौते के बाद पाकिस्तान की ओर से एक बार फिर भारत के खिलाफ तीखी बयानबाजी सामने आई है। पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी के अध्यक्ष और पूर्व विदेश मंत्री बिलावल भुट्टो जरदारी ने सिंधु जल संधि के मुद्दे पर भारत को चेतावनी देते हुए कहा है कि पाकिस्तान अपने हिस्से के पानी पर किसी भी प्रकार का समझौता नहीं करेगा। उन्होंने कहा कि यदि पानी के प्रवाह को रोकने या प्रभावित करने की कोशिश की गई तो पाकिस्तान इसका कड़ा जवाब देगा।बिलावल भुट्टो का यह बयान ऐसे समय में आया है जब भारत ने पहलगाम आतंकी हमले के बाद सिंधु जल संधि को निलंबित कर रखा है। पाकिस्तान लगातार अंतरराष्ट्रीय मंचों पर इस मुद्दे को उठाने की कोशिश कर रहा है, लेकिन उसे अपेक्षित समर्थन नहीं मिल पाया है। ऐसे में अब पाकिस्तान के नेताओं की भाषा पहले से अधिक आक्रामक दिखाई दे रही है।
राष्ट्रीय सभा में भारत पर लगाए आरोप
पाकिस्तान की राष्ट्रीय सभा को संबोधित करते हुए बिलावल भुट्टो ने भारत पर पाकिस्तान का पानी रोकने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान अपनी नदियों के जल पर अधिकार की रक्षा के लिए हर संभव कदम उठाएगा। उनके अनुसार सिंधु नदी प्रणाली से मिलने वाला पानी पाकिस्तान की कृषि, अर्थव्यवस्था और करोड़ों लोगों की आजीविका से जुड़ा हुआ है।उन्होंने दावा किया कि भारत की नीतियां क्षेत्रीय स्थिरता के लिए खतरा बन सकती हैं। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि इस्लामाबाद अपने जल अधिकारों की रक्षा के लिए अंतरराष्ट्रीय कानूनों और कूटनीतिक मंचों का सहारा लेता रहेगा। पाकिस्तान की संसद में दिए गए इस बयान को वहां की राजनीति में भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
पहले भी विवादित बयान दे चुके हैं बिलावल
यह पहली बार नहीं है जब बिलावल भुट्टो ने सिंधु जल संधि को लेकर विवादित बयान दिया हो। इससे पहले भी उन्होंने भारत के खिलाफ तीखी टिप्पणियां की थीं, जिनकी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आलोचना हुई थी। पहलगाम आतंकी हमले के बाद जब भारत ने कई कड़े कदम उठाए थे, तब भी बिलावल ने भारत विरोधी बयान दिए थे।राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पाकिस्तान के भीतर बढ़ते आर्थिक और राजनीतिक दबाव के बीच वहां के नेता अक्सर भारत विरोधी मुद्दों को हवा देकर घरेलू समर्थन जुटाने की कोशिश करते हैं। सिंधु जल संधि का मुद्दा भी इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।
संयुक्त राष्ट्र में भारत ने दोहराया अपना रुख
भारत ने संयुक्त राष्ट्र समेत कई अंतरराष्ट्रीय मंचों पर स्पष्ट कर दिया है कि आतंकवाद और सामान्य संबंध एक साथ नहीं चल सकते। भारत का कहना है कि पाकिस्तान लंबे समय से सीमा पार आतंकवाद को समर्थन देता रहा है और जब तक इस स्थिति में बदलाव नहीं आता, तब तक संबंधों में सामान्य स्थिति की उम्मीद नहीं की जा सकती।संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के बासठवें सत्र में भारत की प्रतिनिधि अनुपमा सिंह ने कहा कि वर्ष 1960 में हुई सिंधु जल संधि को स्थायी और अपरिवर्तनीय अधिकार के रूप में नहीं देखा जा सकता। उन्होंने कहा कि बदलती परिस्थितियों, सुरक्षा चुनौतियों और जवाबदेही के आधार पर भारत अपने राष्ट्रीय हितों की रक्षा करेगा।
यूरोप में भी उठा रहा है यह मुद्दा
पाकिस्तान केवल संयुक्त राष्ट्र ही नहीं बल्कि यूरोप में भी सिंधु जल संधि का मुद्दा उठा रहा है। बेल्जियम की राजधानी ब्रुसेल्स में आयोजित एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में पाकिस्तान के उप प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री इशाक डार ने भारत की जल परियोजनाओं पर चिंता जताई। उन्होंने दावा किया कि भारत की नई परियोजनाएं पाकिस्तान के जल संसाधनों को प्रभावित कर सकती हैं।पाकिस्तानी पक्ष का कहना है कि भारत द्वारा विकसित की जा रही विभिन्न जलविद्युत और जल प्रबंधन परियोजनाओं से भविष्य में पाकिस्तान को जल संकट का सामना करना पड़ सकता है। हालांकि भारत लगातार यह कहता रहा है कि उसकी सभी परियोजनाएं अंतरराष्ट्रीय नियमों और तकनीकी मानकों के अनुरूप हैं।
आतंकवाद पर भारत का स्पष्ट संदेश
भारत का रुख लगातार एक जैसा रहा है कि जब तक पाकिस्तान अपनी धरती से संचालित आतंकवादी गतिविधियों पर प्रभावी कार्रवाई नहीं करता, तब तक विश्वास बहाली संभव नहीं है। भारत ने कई बार कहा है कि सीमा पार आतंकवाद क्षेत्रीय शांति और विकास के लिए सबसे बड़ी चुनौती है।नई दिल्ली का मानना है कि जल समझौतों और द्विपक्षीय संबंधों पर चर्चा तभी सार्थक हो सकती है जब दोनों देशों के बीच विश्वास का वातावरण बने। भारत ने यह भी दोहराया है कि राष्ट्रीय सुरक्षा और नागरिकों की रक्षा उसके लिए सर्वोच्च प्राथमिकता है।