भारतीय आम की मिठास पहुंची 45 देशों तक

भारतीय आम का निर्यात इस वर्ष रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है। एपीडा के अनुसार भारत अब 45 से अधिक देशों को आम निर्यात कर रहा है। अमेरिका में भारतीय आम की मांग तेजी से बढ़ी है और इस सीजन वहां निर्यात में 30 प्रतिशत से अधिक वृद्धि की संभावना जताई गई है।

भारतीय आम की मिठास पहुंची 45 देशों तक

दि राइजिंग न्यूज़ | नई दिल्ली | 18 जून 2026

भारतीय आम ने बनाया नया रिकॉर्ड

भारतीय आम की मांग दुनिया भर में लगातार बढ़ रही है और इस वर्ष निर्यात के नए कीर्तिमान स्थापित होते दिखाई दे रहे हैं। कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एपीडा) के अनुसार, मौजूदा सीजन में भारत का आम निर्यात 45 से अधिक देशों तक पहुंच चुका है। यह भारतीय कृषि उत्पादों की वैश्विक स्वीकार्यता और बढ़ती लोकप्रियता का संकेत माना जा रहा है।

एपीडा के अध्यक्ष अभिषेक देव ने बताया कि भारतीय आम की गुणवत्ता और स्वाद के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजारों में इसकी मांग लगातार मजबूत बनी हुई है। यही कारण है कि इस सीजन में निर्यात के आंकड़े पिछले वर्षों की तुलना में कहीं बेहतर दिखाई दे रहे हैं।

अमेरिका में बढ़ी भारतीय आम की मांग

अमेरिका भारतीय आम के लिए सबसे महत्वपूर्ण और बड़ा आयातक बाजार माना जाता है। एपीडा के अनुसार इस वर्ष अमेरिका को भेजे गए भारतीय आम की मात्रा ने सीजन समाप्त होने से लगभग एक माह पहले ही पिछले पूरे सीजन के निर्यात आंकड़ों को पीछे छोड़ दिया है। अभिषेक देव ने बताया कि मौजूदा रुझानों को देखते हुए इस वर्ष अमेरिका को भारतीय आम का निर्यात 30 प्रतिशत से अधिक बढ़ सकता है। यह वृद्धि भारतीय किसानों और निर्यातकों दोनों के लिए सकारात्मक संकेत मानी जा रही है।

प्रचार अभियान का मिला लाभ

अमेरिकी बाजार में भारतीय आम की पहुंच और पहचान बढ़ाने के लिए एपीडा ने कई बड़े शहरों में विशेष प्रचार अभियान चलाए। इन शहरों में सिएटल, लॉस एंजेलिस, वॉशिंगटन, न्यूयॉर्क और अटलांटा शामिल हैं। इन अभियानों का उद्देश्य भारतीय आम की गुणवत्ता, स्वाद और विविधता को उपभोक्ताओं तक पहुंचाना था। विशेषज्ञों का मानना है कि इन प्रयासों का सकारात्मक असर निर्यात आंकड़ों में साफ दिखाई दे रहा है।

अन्य देशों में भी बढ़ा विस्तार

अमेरिका के अलावा भारत ने इस वर्ष लगभग 20 अन्य देशों में भी आम के प्रचार और विपणन कार्यक्रम आयोजित किए। इनमें चेक गणराज्य, मलेशिया, स्पेन, संयुक्त अरब अमीरात और ओमान जैसे प्रमुख बाजार शामिल रहे। इन देशों में भारतीय आम को लेकर बढ़ती रुचि ने निर्यातकों के लिए नए अवसर पैदा किए हैं। एपीडा का मानना है कि इन बाजारों में लगातार उपस्थिति बनाए रखने से आने वाले वर्षों में निर्यात और बढ़ सकता है।

अगले दो वर्षों में दोगुना हो सकता है निर्यात

एपीडा अध्यक्ष ने उम्मीद जताई है कि यदि वर्तमान रफ्तार बनी रहती है तो अगले एक से दो वर्षों के भीतर भारत का कुल आम निर्यात दोगुना हो सकता है। इसके लिए नए बाजारों की पहचान, प्रचार गतिविधियों का विस्तार और गुणवत्ता मानकों को मजबूत करने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।  वैश्विक स्तर पर प्राकृतिक और ताजे फलों की मांग बढ़ रही है, जिसका लाभ भारतीय आम उद्योग को मिल सकता है।

कृषि निर्यात में भारत की मजबूत स्थिति

भारत का कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य निर्यात भी लगातार बढ़ रहा है। पिछले वित्त वर्ष में देश का कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य निर्यात 53 अरब डॉलर के स्तर तक पहुंच गया। इससे भारत ने दुनिया के प्रमुख कृषि निर्यातक देशों में अपनी मजबूत स्थिति बनाए रखी है। सरकारी एजेंसियां और निर्यातक संगठनों का प्रयास है कि भारतीय कृषि उत्पादों को अधिक से अधिक अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचाया जाए।

निर्यात उत्पादों की संख्या में बड़ा इजाफा

एपीडा के अनुसार भारत के निर्यात पोर्टफोलियो में भी उल्लेखनीय विस्तार हुआ है। लगभग एक दशक पहले जहां देश से करीब 280 कृषि और खाद्य उत्पाद निर्यात किए जाते थे, वहीं अब यह संख्या बढ़कर लगभग 500 तक पहुंच चुकी है। यह बदलाव भारतीय कृषि क्षेत्र में विविधता और निर्यात क्षमता के विस्तार को दर्शाता है। विभिन्न फलों, सब्जियों और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पादों की वैश्विक मांग बढ़ने से भारत को नए अवसर मिल रहे हैं।

नए बाजारों के खुले दरवाजे

हाल के वर्षों में कई देशों ने भारतीय कृषि उत्पादों के लिए अपने बाजार खोले हैं। रूस ने भारतीय आलू और अनार के आयात की अनुमति दी है। वहीं वियतनाम ने भारतीय अंगूर के आयात को मंजूरी प्रदान की है। इसके अलावा ऑस्ट्रेलिया ने भी भारतीय अनार के आयात को स्वीकृति देकर भारतीय निर्यातकों के लिए एक नया अवसर उपलब्ध कराया है।

वैश्विक मंचों पर बढ़ रही भागीदारी

भारतीय कृषि उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने के लिए एपीडा विभिन्न वैश्विक प्रदर्शनियों और खाद्य मेलों में भारतीय निर्यातकों की भागीदारी बढ़ा रहा है। इन आयोजनों के माध्यम से नए खरीदारों तक पहुंच बनाने और दीर्घकालिक व्यापारिक संबंध स्थापित करने का प्रयास किया जा रहा है।  यदि इसी तरह नए बाजारों में विस्तार जारी रहा तो भारतीय आम सहित अन्य कृषि उत्पादों का निर्यात आने वाले वर्षों में और तेज गति से बढ़ सकता है। भारतीय आम की बढ़ती वैश्विक लोकप्रियता देश के किसानों, निर्यातकों और कृषि अर्थव्यवस्था के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है।