तालिबान का नया फरमान, स्मार्टफोन पर रोक

अफगानिस्तान में तालिबान सरकार ने सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों के स्मार्टफोन इस्तेमाल करने पर सख्त प्रतिबंध लगा दिया है। आदेश के अनुसार स्मार्टफोन का उपयोग करते पकड़े जाने पर फोन तोड़ा जा सकता है और संबंधित व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

तालिबान का नया फरमान, स्मार्टफोन पर रोक

दि राइजिंग न्यूज़ | काबुल | 19 जून 2026

अफगानिस्तान में स्मार्टफोन पर तालिबानी शिकंजा

अफगानिस्तान में तालिबान सरकार ने एक और सख्त फैसला लेते हुए सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों के स्मार्टफोन इस्तेमाल करने पर प्रतिबंध लगा दिया है। इस आदेश के बाद देश में डिजिटल स्वतंत्रता और नागरिक अधिकारों को लेकर नई बहस शुरू हो गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम अफगानिस्तान को तकनीकी और सामाजिक रूप से दुनिया से और अधिक अलग-थलग कर सकता है।

सरकारी कर्मचारियों के लिए नया आदेश

तालिबान की सैन्य अदालतों द्वारा जारी निर्देश के अनुसार किसी भी सरकारी अधिकारी, कर्मचारी या मुजाहिदीन को स्मार्टफोन रखने या उपयोग करने की अनुमति नहीं होगी। आदेश में कहा गया है कि यदि कोई व्यक्ति स्मार्टफोन का इस्तेमाल करते हुए पाया गया तो उसका मोबाइल फोन मौके पर ही नष्ट किया जा सकता है।इसके साथ ही संबंधित व्यक्ति के खिलाफ कानूनी और शरिया कानून के तहत कार्रवाई भी की जाएगी। केवल विशेष परिस्थितियों में ही स्मार्टफोन रखने की अनुमति दी जाएगी और इसके लिए तालिबान के सर्वोच्च नेता हिबातुल्लाह अखुंदजादा की लिखित मंजूरी आवश्यक होगी।

सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो

अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार सोशल मीडिया पर कुछ ऐसे वीडियो सामने आए हैं जिनमें तालिबान अधिकारी लोगों को आदेश पढ़कर सुनाते और मोबाइल फोन तोड़ते दिखाई दे रहे हैं।हालांकि तालिबान प्रशासन की ओर से इन वीडियो की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है, लेकिन इन दावों ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय का ध्यान अपनी ओर खींचा है।

पूरे देश में एक समान लागू नहीं

रिपोर्टों के मुताबिक यह प्रतिबंध फिलहाल पूरे देश में एक समान तरीके से लागू नहीं किया जा रहा है। कुछ क्षेत्रों में यह केवल सरकारी कर्मचारियों तक सीमित है, जबकि कुछ प्रांतों में इसका असर महिलाओं, छात्रों, शिक्षकों और स्वास्थ्यकर्मियों तक भी पहुंचता दिखाई दे रहा है।इससे यह संकेत मिल रहा है कि तालिबान धीरे-धीरे प्रतिबंधों का दायरा बढ़ाने की रणनीति पर काम कर सकता है।

दुनिया से कट सकता है अफगानिस्तान

राजनीतिक और तकनीकी विशेषज्ञों का मानना है कि स्मार्टफोन पर प्रतिबंध लगाने जैसी नीतियां अफगानिस्तान को वैश्विक संचार और आधुनिक तकनीक से दूर ले जा सकती हैं।आज के दौर में स्मार्टफोन केवल संवाद का साधन नहीं बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य, बैंकिंग, व्यापार और सरकारी सेवाओं तक पहुंच का महत्वपूर्ण माध्यम बन चुके हैं। ऐसे में इस प्रकार के प्रतिबंध का व्यापक प्रभाव पड़ सकता है।

इंटरनेट पर पहले भी लगाया था नियंत्रण

यह पहला अवसर नहीं है जब तालिबान ने डिजिटल माध्यमों पर सख्ती दिखाई हो। पिछले वर्ष सितंबर में देशभर में इंटरनेट सेवाओं को अस्थायी रूप से बंद कर दिया गया था।तालिबान ने उस समय दावा किया था कि यह कदम अनैतिक सामग्री के प्रसार को रोकने के लिए उठाया गया है। हालांकि इंटरनेट बंद होने से व्यापार, बैंकिंग, विमानन सेवाओं और आपातकालीन सेवाओं पर गंभीर असर पड़ा था। बढ़ते दबाव के बाद सरकार को सेवाएं बहाल करनी पड़ी थीं।

विरोध प्रदर्शनों से बढ़ी चिंता

विश्लेषकों का मानना है कि हाल ही में हेरात शहर में हुए महिला विरोध प्रदर्शनों के वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद तालिबान की चिंता बढ़ गई है।इन प्रदर्शनों में महिलाओं और लड़कियों की गिरफ्तारी का विरोध किया गया था। कई अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने आरोप लगाया था कि प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की गई और हिंसा की घटनाएं भी सामने आईं। सोशल मीडिया के माध्यम से इन घटनाओं की तस्वीरें और वीडियो तेजी से दुनिया तक पहुंचे, जिससे तालिबान को अंतरराष्ट्रीय आलोचना का सामना करना पड़ा।

गोपनीय जानकारी लीक होने का डर

स्मार्टफोन प्रतिबंध के पीछे एक और वजह सरकारी सूचनाओं का लीक होना बताया जा रहा है। तालिबान प्रशासन का मानना है कि कई अधिकारी मोबाइल फोन और सोशल मीडिया के माध्यम से गोपनीय दस्तावेज तथा बैठकों की जानकारी सार्वजनिक कर देते हैं।कुछ मामलों में सरकारी फैसलों की जानकारी आधिकारिक घोषणा से पहले ही इंटरनेट पर पहुंच गई थी, जिससे प्रशासन की कार्यप्रणाली प्रभावित हुई।

कर्मचारियों पर लगाए जा रहे आरोप

तालिबान का यह भी तर्क है कि कई कर्मचारी कार्यालय समय में मोबाइल फोन का अत्यधिक उपयोग करते हैं और इससे सरकारी कामकाज प्रभावित होता है।हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि यह समस्या केवल अफगानिस्तान तक सीमित नहीं है और दुनिया के कई देशों में देखी जाती है। उनका मानना है कि इसके समाधान के लिए कार्यस्थल संबंधी नियम बनाए जा सकते हैं, लेकिन स्मार्टफोन पर पूर्ण प्रतिबंध आधुनिक प्रशासनिक व्यवस्था के अनुरूप नहीं माना जा सकता।

बढ़ रही अंतरराष्ट्रीय चिंता

मानवाधिकार संगठनों और अंतरराष्ट्रीय पर्यवेक्षकों ने इस फैसले पर चिंता व्यक्त की है। उनका कहना है कि संचार के साधनों पर प्रतिबंध नागरिक स्वतंत्रता को सीमित कर सकता है और लोगों की सूचना तक पहुंच को प्रभावित कर सकता है। यदि भविष्य में यह प्रतिबंध पूरे देश और आम नागरिकों तक विस्तारित किया गया तो अफगानिस्तान की डिजिटल प्रगति को गंभीर झटका लग सकता है।तालिबान का यह नया कदम एक बार फिर इस बहस को जन्म दे रहा है कि क्या अफगानिस्तान आधुनिक तकनीकी युग से दूरी बनाकर एक अधिक नियंत्रित और सीमित व्यवस्था की ओर बढ़ रहा है। आने वाले समय में इस नीति का वास्तविक प्रभाव देश की सामाजिक, आर्थिक और तकनीकी स्थिति पर स्पष्ट रूप से दिखाई दे सकता है।