पाठ्यपुस्तकों में 1678 बड़ी गलतियां

ओडिशा की नई स्कूली पाठ्यपुस्तकों में 1,678 से अधिक तथ्यात्मक, छपाई और विषयगत गलतियां मिलने के बाद बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। वैज्ञानिक आइजैक न्यूटन को पायलट बताने से लेकर ऐतिहासिक और भौगोलिक तथ्यों में गंभीर त्रुटियों ने शिक्षा विभाग को कठघरे में खड़ा कर दिया है।

पाठ्यपुस्तकों में 1678 बड़ी गलतियां

दि राइजिंग न्यूज़ | भुवनेश्वर | 19 जून 2026

स्कूली किताबों में सामने आई बड़ी चूक

ओडिशा में शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए प्रकाशित नई स्कूली पाठ्यपुस्तकों को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। कक्षा 1 से 8 तक की किताबों में कुल 1,678 गलतियां मिलने के बाद शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। इन त्रुटियों में तथ्यात्मक गलतियों से लेकर छपाई और विषय संबंधी चूकें शामिल हैं। मामले ने तब और तूल पकड़ लिया जब किताबों में विश्व प्रसिद्ध वैज्ञानिक सर आइजैक न्यूटन को वैज्ञानिक के बजाय “महानतम पायलट” बताया गया। इस गलती के सामने आने के बाद अभिभावकों, शिक्षकों और शिक्षा विशेषज्ञों ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है।

ऐतिहासिक और भौगोलिक तथ्यों में भी गड़बड़ी

नई पाठ्यपुस्तकों में कई ऐतिहासिक और भौगोलिक तथ्यों को भी गलत तरीके से प्रस्तुत किया गया है। कर्नाटक विधानसभा की तस्वीर को ओडिशा विधानसभा के रूप में प्रकाशित किया गया है। इसके अलावा कर्नाटक के ऐतिहासिक हम्पी मंदिर परिसर की तस्वीर को कोणार्क सूर्य मंदिर बताकर छापा गया। भूगोल की पुस्तकों में भी गंभीर त्रुटियां सामने आई हैं। ओडिशा की प्रसिद्ध नियमगिरी पहाड़ियों को झारखंड में दर्शाया गया है। वहीं गंजम जिले के प्रमुख शहर ब्रह्मपुर को एक अलग जिला बताकर प्रकाशित कर दिया गया।

आठवीं कक्षा की पुस्तकों में सबसे अधिक त्रुटियां

शिक्षा विभाग द्वारा जारी जानकारी के अनुसार कुल 1,678 गलतियों में से 705 त्रुटियां केवल कक्षा आठवीं की पुस्तकों में पाई गई हैं। इन किताबों में गेहूं को धान बताया गया है। कांच के गिलास को कप लिखा गया है। तापमान और दबाव जैसी वैज्ञानिक अवधारणाओं को भी गलत तरीके से प्रस्तुत किया गया है। इसके अलावा खाद्य जाल को खाद्य चक्र बताया गया है, जिससे छात्रों की मूलभूत समझ प्रभावित हो सकती है। एक अन्य बड़ी गलती में ‘विषुवत’ की अवधारणा को भूमध्य रेखा के रूप में समझाया गया है, जबकि दोनों शब्दों का अर्थ और संदर्भ पूरी तरह अलग हैं।

राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत तैयार हुई थीं किताबें

सबसे अधिक चिंता की बात यह है कि ये पाठ्यपुस्तकें राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 और ओडिशा पाठ्यचर्या रूपरेखा 2025 के अनुरूप तैयार की गई थीं। इनके निर्माण और संपादन की जिम्मेदारी डायरेक्टरेट ऑफ टीचर एजुकेशन तथा राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद जैसी महत्वपूर्ण संस्थाओं के पास थी। इतनी बड़ी संख्या में त्रुटियां सामने आने के बाद पाठ्यपुस्तक निर्माण और गुणवत्ता नियंत्रण प्रक्रिया पर गंभीर प्रश्न खड़े हो गए हैं।

मुख्यमंत्री ने मांगी रिपोर्ट

मामले के सामने आने के बाद मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने सख्त रुख अपनाया है। उन्होंने पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय जांच के आदेश दिए हैं और संबंधित अधिकारियों से सात दिनों के भीतर विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा है। मुख्यमंत्री ने यह भी निर्देश दिया है कि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए पाठ्यपुस्तक निर्माण प्रक्रिया की व्यापक समीक्षा की जाए।

शिक्षा विभाग ने स्वीकार की गलती

विवाद बढ़ने के बाद स्कूल और जनशिक्षा विभाग ने आधिकारिक रूप से इन गलतियों को स्वीकार कर लिया है। विभाग ने माना है कि पाठ्यपुस्तकों में कई तथ्यात्मक और तकनीकी त्रुटियां रह गई हैं। विभाग के अनुसार छात्रों की पढ़ाई प्रभावित न हो, इसके लिए सभी स्कूलों को एक विस्तृत शुद्धिपत्र जारी किया गया है। शिक्षकों को निर्देश दिए गए हैं कि वे कक्षाओं में पढ़ाते समय पुस्तकों में मौजूद त्रुटियों को शुद्धिपत्र के आधार पर सुधारकर समझाएं।

अभिभावकों और विशेषज्ञों में नाराजगी

किताबों में इतनी बड़ी संख्या में गलतियां मिलने के बाद अभिभावकों और शिक्षा विशेषज्ञों ने नाराजगी जताई है। उनका कहना है कि प्राथमिक और माध्यमिक स्तर पर दी जाने वाली शिक्षा बच्चों की बुनियादी समझ विकसित करती है। ऐसे में गलत जानकारी छात्रों के ज्ञान और भविष्य दोनों को प्रभावित कर सकती है। पाठ्यपुस्तकों के प्रकाशन से पहले कई स्तरों पर समीक्षा और तथ्य जांच की प्रक्रिया होनी चाहिए थी, जिससे ऐसी गंभीर त्रुटियों को रोका जा सकता था।

गुणवत्ता नियंत्रण पर उठे सवाल

इस पूरे घटनाक्रम ने राज्य की शैक्षणिक सामग्री तैयार करने वाली संस्थाओं की गुणवत्ता नियंत्रण प्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। शिक्षा जगत से जुड़े लोगों का कहना है कि केवल गलतियों को सुधारना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि यह भी जांचना आवश्यक है कि इतनी बड़ी चूक आखिर किन स्तरों पर हुई। अब सभी की नजर मुख्यमंत्री द्वारा गठित जांच प्रक्रिया और उसकी रिपोर्ट पर टिकी हुई है। उम्मीद की जा रही है कि जांच के बाद जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय की जाएगी और भविष्य में पाठ्यपुस्तकों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए नए मानक लागू किए जाएंगे।