ममता बनर्जी की सुरक्षा को लेकर नया विवाद
ममता बनर्जी की सुरक्षा में तैनात सुरक्षाकर्मियों को बदले जाने के आरोपों ने पश्चिम बंगाल की राजनीति में नया विवाद खड़ा कर दिया है। तृणमूल कांग्रेस ने इसे राजनीतिक प्रतिशोध बताया है, जबकि प्रशासन ने सभी आरोपों को निराधार करार दिया है।
दि राइजिंग न्यूज़ | कोलकाता | 18 जून 2026
पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बार फिर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। तृणमूल कांग्रेस प्रमुख और पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर पार्टी नेताओं ने गंभीर सवाल उठाए हैं। तृणमूल कांग्रेस का आरोप है कि ममता बनर्जी के कोलकाता स्थित आवास पर लंबे समय से तैनात सुरक्षाकर्मियों को अचानक बदल दिया गया, जिससे उनकी सुरक्षा प्रभावित हुई है। इस मुद्दे ने राज्य की राजनीति में नया तूफान खड़ा कर दिया है।पार्टी नेताओं का कहना है कि यह केवल सुरक्षा का मामला नहीं बल्कि राजनीतिक प्रतिशोध का हिस्सा है। तृणमूल कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि नई सरकार राजनीतिक विरोधियों को निशाना बनाने की नीति पर काम कर रही है। वहीं प्रशासन की ओर से इन आरोपों को खारिज किया जा रहा है।
डेरेक ओ'ब्रायन ने उठाए सवाल, देर रात कार्रवाई का लगाया आरोप
तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद डेरेक ओ'ब्रायन ने इस मामले को सार्वजनिक करते हुए गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका दावा है कि ममता बनर्जी की सुरक्षा में तैनात तीन सुरक्षाकर्मियों को देर रात अचानक बदल दिया गया। उन्होंने कहा कि जिस समय यह कार्रवाई हुई, उस दौरान आवास के प्रवेश द्वार पर पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था मौजूद नहीं थी।डेरेक ओ'ब्रायन ने इसे बेहद चिंताजनक बताते हुए कहा कि किसी भी बड़े राजनीतिक नेता की सुरक्षा के साथ इस प्रकार का प्रयोग नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर सुरक्षा व्यवस्था में बदलाव की आवश्यकता क्यों पड़ी और इसके पीछे वास्तविक कारण क्या हैं।
महुआ मोइत्रा का हमला, सरकार पर लगाए प्रतिशोध के आरोप
तृणमूल कांग्रेस सांसद महुआ मोइत्रा ने भी इस मुद्दे पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि तीन बार मुख्यमंत्री और सात बार सांसद रह चुकी ममता बनर्जी के साथ इस प्रकार का व्यवहार लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है। महुआ मोइत्रा ने आरोप लगाया कि राजनीतिक प्रतिशोध की भावना से प्रेरित होकर यह कदम उठाया गया है।उन्होंने कहा कि विपक्षी नेताओं की सुरक्षा को कमजोर करने की किसी भी कोशिश को स्वीकार नहीं किया जा सकता। उनके अनुसार यह मामला केवल एक व्यक्ति की सुरक्षा का नहीं बल्कि लोकतांत्रिक संस्थाओं और राजनीतिक शुचिता से भी जुड़ा हुआ है।
सागरिका घोष ने कहा- सुरक्षा राजनीति का विषय नहीं
राज्यसभा सांसद सागरिका घोष ने भी इस पूरे घटनाक्रम पर चिंता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि किसी पूर्व मुख्यमंत्री की सुरक्षा को राजनीतिक विवाद का विषय नहीं बनाया जाना चाहिए। सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करना सरकार और प्रशासन की संवैधानिक जिम्मेदारी है।सागरिका घोष ने आरोप लगाया कि राज्य में प्रतिशोध की राजनीति का माहौल बन गया है। उन्होंने कहा कि यदि सुरक्षा जैसे संवेदनशील विषयों को राजनीतिक हथियार बनाया गया तो लोकतांत्रिक व्यवस्था पर गंभीर असर पड़ सकता है।
पुलिस प्रशासन ने आरोपों को बताया निराधार
दूसरी ओर पुलिस और प्रशासनिक सूत्रों ने तृणमूल कांग्रेस के आरोपों को खारिज किया है। अधिकारियों का कहना है कि ममता बनर्जी की सुरक्षा व्यवस्था में किसी प्रकार की कटौती नहीं की गई है और सुरक्षा मानकों का पूरी तरह पालन किया जा रहा है। प्रशासन का दावा है कि सुरक्षा संबंधी सभी निर्णय नियमों और आवश्यकताओं के आधार पर लिए जाते हैं।अधिकारियों के अनुसार किसी भी राजनीतिक आरोप का वास्तविक स्थिति से कोई संबंध नहीं है। सुरक्षा व्यवस्था पहले की तरह जारी है और किसी भी प्रकार की लापरवाही नहीं बरती गई है।
बंगाल की राजनीति में बढ़ा टकराव
सुरक्षा विवाद ऐसे समय सामने आया है जब पश्चिम बंगाल में राजनीतिक माहौल पहले से ही बेहद गर्म है। सत्ता परिवर्तन के बाद लगातार आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है और तृणमूल कांग्रेस तथा नई सरकार के बीच टकराव बढ़ता दिखाई दे रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले दिनों में यह विवाद और अधिक गहराने की संभावना है।ममता बनर्जी की सुरक्षा को लेकर उठे सवालों ने राज्य की राजनीति को नई दिशा दे दी है। अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि प्रशासन और राजनीतिक दल इस विवाद को किस तरह आगे बढ़ाते हैं।