उद्धव गुट में बढ़ी सियासी हलचल

शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे द्वारा बुलाई गई संसदीय दल की बैठक में केवल तीन सांसदों की मौजूदगी ने पार्टी में संभावित टूट की अटकलों को और तेज कर दिया है। छह सांसदों के बैठक से नदारद रहने के बाद उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है, जबकि बागी सांसदों की सुरक्षा भी बढ़ा दी गई है।

उद्धव गुट में बढ़ी सियासी हलचल

दि राइजिंग न्यूज़ | मुंबई | 19 जून 2026

उद्धव गुट में बढ़ी बगावत की आहट

महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम देखने को मिल रहा है। शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे द्वारा बुलाई गई संसदीय दल की महत्वपूर्ण बैठक में अपेक्षित संख्या में सांसदों की मौजूदगी नहीं रही। बैठक में केवल तीन सांसदों के पहुंचने से पार्टी के भीतर संभावित टूट और बगावत की चर्चाओं ने जोर पकड़ लिया है। बैठक में अनिल देसाई, अरविंद सावंत और राजा भाऊ वाजे शामिल हुए। वहीं शिवसेना (यूबीटी) के प्रमुख नेता संजय राउत भी पार्टी के पक्ष में सक्रिय दिखाई दिए। दूसरी ओर छह सांसदों के बैठक से अनुपस्थित रहने पर पार्टी नेतृत्व ने कड़ा रुख अपनाते हुए उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया है।

शिंदे गुट के दावों से बढ़ी हलचल

एकनाथ शिंदे गुट की ओर से पहले ही दावा किया जा चुका है कि उद्धव ठाकरे की पार्टी के छह सांसद उनके संपर्क में हैं और उन्होंने शिंदे नेतृत्व पर भरोसा जताया है। शिवसेना के विधान परिषद सदस्य चंद्रकांत रघुवंशी ने इसे ‘ऑपरेशन टाइगर’ का नाम देते हुए कहा था कि कई सांसद पार्टी बदलने के लिए तैयार हैं। इन दावों के बाद महाराष्ट्र की राजनीति में नई चर्चाएं शुरू हो गई हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि बड़ी संख्या में सांसद अलग गुट बनाते हैं तो इसका असर शिवसेना (यूबीटी) की संसदीय ताकत पर पड़ सकता है।

नया संसदीय समूह बनने की चर्चा

सूत्रों के अनुसार शिवसेना (यूबीटी) से अलग हुए सांसद जल्द ही एक अलग संसदीय समूह का गठन कर सकते हैं। जानकारी के मुताबिक परभणी से सांसद संजय बंडू जाधव को इस संभावित नए समूह का नेता बनाया जा सकता है। हालांकि अभी तक इस संबंध में कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है, लेकिन राजनीतिक गलियारों में इस संभावना को गंभीरता से देखा जा रहा है। यदि ऐसा होता है तो महाराष्ट्र की राजनीति में यह एक और बड़ा बदलाव माना जाएगा।

संजय राउत का तीखा बयान

संसद परिसर में मीडिया से बातचीत करते हुए शिवसेना (यूबीटी) नेता संजय राउत ने बागी सांसदों पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि जो सांसद पार्टी की बैठक में शामिल हुए हैं, वे पार्टी के प्रति वफादार हैं, जबकि जो नहीं आए हैं, वे जनता और पार्टी के विश्वास से दूर जा रहे हैं। राउत के इस बयान को पार्टी के भीतर बढ़ते असंतोष और नेतृत्व की चिंता के रूप में देखा जा रहा है।

लोकसभा अध्यक्ष से मुलाकात की चर्चा

राजनीतिक अटकलों के बीच यह जानकारी भी सामने आई है कि बागी सांसदों के एक समूह ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से अनौपचारिक मुलाकात की है। सूत्रों का दावा है कि इन सांसदों ने अपने पास नौ में से छह सांसदों का समर्थन होने की बात कही है। दलबदल विरोधी कानून के तहत किसी भी विभाजन को मान्यता दिलाने के लिए दो-तिहाई समर्थन आवश्यक माना जाता है। ऐसे में छह सांसदों का समर्थन किसी भी नए राजनीतिक कदम के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

बागी सांसदों की सुरक्षा बढ़ाई गई

शिवसेना (यूबीटी) में बढ़ती राजनीतिक गतिविधियों के बीच केंद्र सरकार के निर्देश पर बागी सांसदों की सुरक्षा भी बढ़ा दी गई है। गृह मंत्रालय के निर्देश के बाद महाराष्ट्र पुलिस को इन सांसदों को तत्काल प्रभाव से ‘वाई प्लस’ श्रेणी के बराबर स्थानीय सुरक्षा उपलब्ध कराने के आदेश दिए गए हैं। आधिकारिक संदेश में कहा गया है कि स्थानीय परिस्थितियों और संभावित खतरे के आकलन के आधार पर सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। जिला स्तर की सुरक्षा समीक्षा समितियों को भी सुरक्षा व्यवस्था की नियमित समीक्षा करने के निर्देश दिए गए हैं।

कार्यकर्ता सड़कों पर उतरे

दूसरी ओर उद्धव ठाकरे गुट के कार्यकर्ताओं ने संभावित बगावत के खिलाफ विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया है। कई स्थानों पर कार्यकर्ताओं ने पार्टी के प्रति निष्ठा बनाए रखने की अपील की और बागी नेताओं के खिलाफ नाराजगी जाहिर की। पार्टी कार्यकर्ताओं का कहना है कि शिवसेना की मूल विचारधारा और नेतृत्व के साथ विश्वासघात स्वीकार नहीं किया जाएगा। इस कारण आने वाले दिनों में राजनीतिक तनाव और बढ़ सकता है।

महाराष्ट्र की राजनीति पर असर

शिवसेना पहले भी बड़े राजनीतिक विभाजन का सामना कर चुकी है, जब एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में बड़ी संख्या में विधायक अलग हो गए थे। अब यदि सांसदों का एक और समूह पार्टी से अलग होता है तो इसका असर न केवल शिवसेना (यूबीटी) बल्कि महाराष्ट्र की समूची राजनीति पर पड़ सकता है। फिलहाल सभी की नजरें बागी सांसदों के अगले कदम और पार्टी नेतृत्व की रणनीति पर टिकी हुई हैं। आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि यह केवल राजनीतिक दबाव बनाने की कोशिश है या फिर शिवसेना (यूबीटी) एक और बड़े विभाजन की ओर बढ़ रही है।